Chaibasa News : पुलिस ने रोकी ग्रामीणों की न्याय यात्रा, सड़क पर बैठे आंदोलनकारी

ग्रामीणों को रोकने के लिए पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर नाकेबंदी कर रखी थी

चाईबासा.

पश्चिमी सिंहभूम जिले में भारी वाहनों की बेतहाशा आवाजाही से होने वाली दुर्घटनाओं और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने रांची जा रहे ग्रामीणों को शुक्रवार को प्रशासन ने बीच रास्ते में ही रोक दिया. न्याय यात्रा के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर जा रहे ग्रामीणों को रोकने के लिए पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर नाकेबंदी कर रखी थी, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर धरना देना शुरू कर दिया. आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा.

आरोप : ग्रामीणों को ला रहीं बसों को जब्त किया, मालिकों को डराया-धमकाया गया

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्रनाथ चंपिया और रामाय पूर्ति ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने संवैधानिक लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए तानाशाही रवैया अपनाया है. उन्होंने बताया कि भादुड़ी, गीतिलपि और झींकपानी जैसे क्षेत्रों से ग्रामीणों को ला रही बसों को पुलिस ने जब्त कर लिया. आरोप है कि बस मालिकों को डराया-धमकाया गया और उनके परमिट रद्द करने की धमकी दी गयी, ताकि ग्रामीण रांची न पहुंच सकें.

जनता की आवाज कुचलने का प्रयास : ग्रामीण

ग्रामीण चाईबासा के राजू ढाबा और टाटा कॉलेज के सामने सड़क पर बैठ गये. आंदोलनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. वक्ताओं ने कहा कि अपनी समस्याओं को लेकर सूबे के मुखिया से मिलना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यहां पुलिस बल का प्रयोग कर जनता की आवाज को कुचला जा रहा है. इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से चंद्रमोहन बिरुआ, कुसुम केराई, बामिया बारी और रामेश्वर सवैंया सहित भारी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा शामिल थे.

आंदोलनकारियों 
की मुख्य मांगें

– जिले की प्रमुख सड़कों पर भारी वाहनों के लिए ””””नो एंट्री”””” सख्ती से लागू हो

– सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा दिया जाये

– जन आंदोलनों के दौरान ग्रामीणों और आंदोलनकारियों पर दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लिया जाये

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Published by: Atul pathak

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