Bokaro News : तालाब में भर गयी जलकुंभी, 17 वर्षों से नहीं हो रहा भोक्ता पर्व का आयोजन

Bokaro News : पेटरवार प्रखंड के पिछरी स्थित बड़काबांध में जलकुंभी भर गयी है.

पेटरवार प्रखंड अंतर्गत पिछरी उत्तरी पंचायत में मुख्य सड़क के किनारे स्थित बड़काबांध में जलकुंभी भर गयी है. इसके कारण गांव में 17 वर्षों से भोक्ता पर्व का आयोजन नहीं हो रहा है. जलकुंभी के कारण भोक्ता पर्व के दौरान उपयोग किया जाने वाला लकड़ी का खंभा तालाब में फंस गया है और उसे निकाला नहीं जा पा रहा है. दूसरा कारण है कि तालाब का पानी भी दूषित है और अनुष्ठान के लिए इसके पानी का उपयोग नहीं किया जा पा रहा है. पिछरी गांव के विस्थापित नेता सूरज महतो व राम भजन लायक ने बताया कि लगभग सौ वर्ष पूर्व होरील महतो ने गांव के शिव मंदिर परिसर से भोक्ता पर्व का आयोजन शुरू कराया था. पर्व के दौरान ग्रामीण इसी तालाब में

स्नान कर अनुष्ठान में भाग रहे हैं. भोक्ता पर्व में झूला झूलने के लिए उपयोग किया जाने वाला लकड़ी का खंभा पर्व के समापन के बाद तालाब में रख दिया जाता था. अगले बार के आयोजन में खंभा तालाब से निकाल कर उपयोग किया जाता था. यह सिलसिला वर्षों तक चला. बाद में तालाब में जलकुंभी भर जाने के कारण खंभा उसी में रहा गया.

1908 के सर्वे नक्शा में है बड़काबांध

वर्ष 1908 के सर्वे नक्शा में बड़काबांध तालाब को दर्शाया गया है. यह तालाब गैरमजरुआ खाता नंबर 237, प्लॉट नंबर 2349, रकवा 6.30 एकड़ है. अब डीड के माध्यम से रैयती में तब्दील हो गया है. पहले यह तालाब जमींदार किशोरी मोहन चटराज के नाम से था. इन्होंने वर्ष 1955-56 में अपने रिश्तेदार सुदेव कुमार चटराज व अन्य को हुकूमनामा में दे दिया. वर्ष 1970 में इन सभी ने अपने हिस्से का 2.56 एकड़ महादेव मिश्रा, 2.56 एकड़ प्रदुमन मिश्रा व 1.39 एकड़ शंभू मिश्रा को डीड के माध्यम से बेच दिया. वर्ष 1974 में प्रदुमन मिश्रा ने त्रिपुरारी मिश्रा की पत्नी सुभद्रा मिश्रा को अपने हिस्से का 2.56 एकड़ बेच दिया. वर्ष 1998 में शंभू मिश्रा ने अपने हिस्से का आधी भाग किशोरी मिश्रा को बेच दिया है. वर्तमान में बड़काबांध में सुभद्रा देवी, महादेव मिश्रा, शंभू मिश्रा व किशोरी मिश्रा हिस्सेदार हैं.

पिछरी के लिए लाइफ लाइन था यह तालाब

बड़काबांध को पिछरी पंचायत का लाइफ लाइन कहा जाता है. सैकड़ों लोग नहाने, कपड़ा धोने, मवेशियों को पानी पिलाने समेत श्राद्धकर्म के दौरान इसका उपयोग करते था. प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी तालाब में किया जाता था. लोग बताते हैं कि तालाब की दुर्गति स्थानीय लोगों द्वारा भी की गयी है. कुछ लोगों द्वारा घरों का गंदा पानी मुख्य सड़क से बहा दिया जाता है और यह पानी तालाब में जाकर मिल जाता है. इससे तालाब का पानी दूषित हो गया है. बताया जाता है कि वर्षों पूर्व सीसीएल और झारखंड सरकार की योजनाओं से लाखों रुपये खर्च कर तालाब की चहारदीवारी, सफाई और मिट्टी कटाई की काम कराया गया था. बीते वर्ष तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर सीसीएल के कायाकल्प मद से टेंडर निकाला गया था. लेकिन तालाब के कुछ हिस्सेदार द्वारा टेंडर लेने को लेकर विवाद के कारण टेंडर रद्द हो गया.

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Published by: Janak singh choudhary

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