बोकारो में सिर्फ एयरपोर्ट को लेकर ही तारीख पर तारीख नहीं दी जा रही है, बल्कि ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर भी यही हो रहा है. वादा हुआ, बैठक हुई, जगह चिन्हित हुई. फिर से यही प्रक्रिया दोहरायी जायेगी. बार-बार दोहरायी जायेगी. ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर जगह चिन्हित करने की जिम्मेदारी कभी जिला प्रशासन खुद लेता है, तो कभी बीएसएल प्रबंधन को देता है. लेकिन, ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बना. चास में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के लिए कई बार जगह चिन्हित की गयी है. वर्ष 2017-18 में जेल मोड़ के पास जगह चिन्हित की गयी थी. इसके लिए वन विभाग व जिला पदाधिकारी से वार्ता भी हुई थी. लेकिन, कोई फैसला नहीं हो सका. चास के कांड्रा में भी जगह चिह्नित की गयी थी. लेकिन, वहां स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था. चार दिसंबर 2025 को उच्च स्तरीय बैठक कर स्मार्ट सिटी बनाने के उद्देश्य (जिसमें ट्रांसपोर्ट नगर भी शामिल था) के लिए जगह चिह्नित करने की बात हुई. अप्रैल 2024 में तत्कालीन डीसी विजया जाधव ने भी इस दिशा में पहल की थी. कई उपायुक्त आयें व स्थानांतरित हुए, लेकिन 35 साल से ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण अधर में है. ट्रांसपोर्ट नगर बनाने को लेकर जिला के विभिन्न व्यवसायिक संगठनों ने दर्जनों बार प्रयास किये. हर दल के नेता ने हर चुनाव में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का वादा किया. लेकिन, यह हर बार टूट जाता है. बोकारो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के लिए 50 बार कोशिश की है. डीसी से लेकर मुख्यमंत्री, डीटीओ से लेकर सचिव स्तर तक बात की गयी.
जिला में हर दिन 4000-4500 से मालवाहक वाहनों का होता है ठहराव
बोकारो जिला ट्रांसपोर्टिंग के लिहाज से राज्य स्तर पर अग्रणी है. कोल इंडिया, सेल, डीवीसी, ओएजनीसी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल जैसे पीएसयू के अलावा इलेक्ट्रोस्टील (वेदांता) जैसे औद्योगिक संस्थान हैं. इसके अलावा खाद्य सामग्री व अन्य सामान की उपलब्धता के लिए भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर का वृहत पैमाने पर इस्तेमाल होता है. हर दिन औसतन 4000-4500 से मालवाहक जिला में लोडिंग-अनलोडिंग को लेकर ठहरते हैं. कभी संस्थान के गोदाम में ठहराव होता है, तो कभी बीच सड़क पर ही वाहन खड़े होते हैं. इससे आम लोगों के साथ-साथ वाहन चालक, वाहन स्वामी व व्यवसायियों को परेशानी होती है.
जगह के अभाव में सड़कों के किनारे होती है पार्किंग
ट्रांसपोर्ट नगर नहीं होने के कारण बाहर से आये वाहन सामान अनलोड करने के लिए बाजार के बंद होने का इंतजार करता है या फिरसड़क किनारे ही अनलोड करता है. इसके कारण चास नगर निगम क्षेत्र के गुरुद्वारा रोड, धर्मशाला मोड़ से आइटीआइ मोड़ तक, एनएच 32, तलगड़िया रोड, एनएच 23 पर माल वाहकों का जमावड़ा लगा रहता है. इसी तरह हर व्यवसायिक क्षेत्र मसलन, बालीडीह, जैनामोड़ व अन्य जगहों पर सड़क किनारे ही वाहन खड़े रहते हैं.
बड़े वाहनों की छांव में छोटे मालवाहकों की होती कमाई
ट्रांसपोर्ट नगर का काॅन्सेप्ट उल्टा पिरामिड वाला होता है. बाहर के बड़े मालवाहन सामान लेकर ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचते. वहीं सामान अनलोड होता, फिर छोटे मालवाहक वाहनों से सामान गंतव्य तक जाता है. इससे छोटे मालवाहक वाहन वालों की भी कमाई होती है. ट्रांसपोर्ट नगर बनने से वाहन चालकों व व्यापारियों को एक ही जगह ईंधन, मरम्मत, भोजन व आराम जैसी सुविधा मिलती. शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू होती है. यह इ-कॉमर्स व कोल्ड स्टोरेज जैसी इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देता है, जिससे लॉजिस्टिक्स बेहतर होते हैं. ट्रांसपोर्ट नगर के आसपास कई सहायक व्यवसाय (जैसे ढाबा, वर्कशॉप) के खुलने से रोजगार के नये अवसर भी खुलते.
