घर की छोटी-छोटी घटना को भी बढ़ा-चढ़ा कर घरेलू हिंसा बताया जाता है. इस वजह से न्यायालय में घरेलू हिंसा के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इससे रिश्तों में खटास आती है और पारिवारिक व सामाजिक समरसता भी बिगडती है. किसी की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए. यदि सचमुच घरेलू हिंसा हो रही है, तो लेकर आवाज मुखर करें. इससे पहले छोटी-छोटी घटना को घर के बड़े-बुजुर्ग को बतायें. आपसी सलाह व मशविरा से मामलों को समझने का प्रयास करें. भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसका पटाक्षेप करें. यह बातें बोकारो कोर्ट की वरीय अधिवक्ता पुष्पांजलि जायसवाल ने रविवार को प्रभात खबर के ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग कार्यक्रम में पाठकों को सलाह देने के दौरान कही. ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग में धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, बगोदर सहित अन्य जगहों के पाठकों के लगातार फोन आते रहे. सभी के सवालों के जवाब अधिवक्ता पुष्पांजलि ने दिये. कानून के तहत समाधान की राह बतायी.
इन्हें दी सलाह
गोमिया से नंद किशोर का सवाल : गांव में मेरा निजी मकान है. सामने रास्ता है. पहले यह रास्ता चार प्लॉट का तालाब हुआ करता था. दो प्लॉट में तालाब सूख गया है. दो प्लॉट में तालाब है. इसके तीन दावेदार हैं. इसमें मेरे घर के बुजुर्ग भी हैं. रास्ता पिछले कई वर्षों से है. अब एक दावेदार रास्ता को बंद करना चाहते हैं. इससे मेरे घर का रास्ता बंद हो जायेगा.
अधिवक्ता की सलाह : रास्ता सार्वजनिक है. एक दावेदार आप भी हैं, तो घबराये नहीं. आप एक आवेदन सीओ से दें और सारी जानकारी दें. सुनवाई नहीं होने पर डीसी के जनता दरबार में जायें. आपकी समस्या का समाधान हो जायेगा.फुसरो से शिव कुमार वर्णवाल का सवाल : फुसरो में सीएससी सेंटर चलाता हूं. कुछ दिन पहले एक आदमी सेंटर आया. उसने बताया कि गाड़ी खराब हो गयी है. पैसे की सख्त जरूरत है. उसने एक मोबाइल नंबर से मेरे पेटीएम पर 50 हजार रुपया मंगाया. मैंने पैसा उस व्यक्ति को दे दिया. इसके बाद मेरा एकाउंट फ्रीज हो गया. पता चला कि जिसने पैसा भेजा था, उससे इस व्यक्ति ने कुछ सामान सस्ते में दिलाने के नाम पर मेरे पेटीएम पर पैसा मंगवाया था. जिसने पैसा भेजा वह खूंटी का है. स्थानीय पुलिस को जानकारी दे चूका हूं. खूंटी की पुलिस बुला रही है.
अधिवक्ता की सलाह : आप और पैसा भेजने वाला व्यक्ति साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं. आपने स्थानीय थाना में मामला भी दर्ज करा दिया है. सभी कागजात के साथ आप खूंटी थाना जाये. अपने व्यवसाय के बारे में बताये.कोडरमा से बबलू कुमार का सवाल : मैं अपने भाई के साली से शादी करना चाहता हूं. परिवार के सदस्य राजी हैं. लेकिन मेरी भाभी राजी नहीं है.
अधिवक्ता की सलाह : शादी परिवार के सहमति से हो रही है. इससे बड़ी बात क्या हो सकती है. थोड़ा और वक्त लेकर भाभी को मना लें. नहीं मानने पर भी कोई परेशानी नहीं है. शादी का निबंधन जरूर करायें.गिरिडीह से संजय कुमार का सवाल : हम पांच भाई-बहन हैं. अन्य सभी सरकारी नौकरी में हैं. मैं दैनिक मजदूरी करता हूं. पिताजी ने रिटायर होने के बाद सभी भाई-बहनों के बीच बराबर पैसा बांट दिया. अब पिताजी को कोई रखने को तैयार नहीं है. मेरी आमदनी कम है, तो पिताजी का पूरा ध्यान नहीं रख पाता हूं. क्या करे.
अधिवक्ता की सलाह : सभी भाई-बहन आपसी सहमति से एक-दूसरे के समक्ष परेशानी रखें. आप बतायें कि आपकी आमदनी कम है. पिताजी की देखभाल अच्छी तरह से नहीं कर पा रहे है. इसके बाद भी बात नहीं बनी, तो समाज के साथ मामले को लेकर बैठक करें. बात नहीं बनने पर न्यायालय का सहारा लें.बोकारो से विवेक रस्तोगी का सवाल : पिता की संपत्ति में बहन का कितना अधिकार होगा. बहन संपत्ति में हिस्सा के लिए लगातार झगड़ा करती है.
अधिवक्ता की सलाह : पिता की संपत्ति में सभी बच्चों को बराबर का हिस्सा होता है. बहन को भी बराबर का हिस्सा मिलेगा. कोशिश करें कि घर के अंदर ही मामला निपट जाये.कोडरमा से बबन शर्मा का सवाल : सरकारी जमीन पर पिछले 50 साल से हमारा घर बना हुआ है. अब कहा जा रहा है कि सरकारी जमीन पर बने घर तोड़ दिये जायेंगे. ऐसे में कहां फरियाद करे.
अधिवक्ता की सलाह : जमीन सरकार की है तो सरकार जब चाहे खाली करा लेगी. सरकार आपको नोटिस भेजेगी. नोटिस का जवाब अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट को दें. यूं ही कोई घर नहीं तोड़ देगा.पेटरवार से शालीग्राम महतो का सवाल : मैंने अपनी जमीन दूसरे को खेती करने के लिए दी था. उस जमीन पर फलदार पौधे लगा दिये गये हैं. पौधे काफी बड़े हो गये हैं. अब मैं अपनी जमीन मांगता हूं, तो वह तैयार नहीं है. क्या करें.
अधिवक्ता की सलाह : जमीन आपकी है, तो आपका ही हक रहेगा. कागजात के साथ सीओ को आवेदन करें. इसके बाद जरूरत के अनुसार न्यायालय का दरवाजा खटखटायें.जमुआ से सरयू शर्मा का सवाल : बेटी की शादी पांच साल पहले की थी. उसके ससुराल वाले लगातार दहेज के लिए तंग कर रहे थे. कई बार मांग पूरी की. अब आमदनी नहीं है. बेटी को ससुरालवाले परेशान करते हैं. क्या करें.
अधिवक्ता की सलाह : दहेज मांगना व देना, दोनों अपराध है. देर नहीं करें. एक बार सामाजिक स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास करें. अन्यथा न्यायालय की शरण लें. बगोदर से शत्रुघ्न शर्मा का सवाल : मूक-बधिर बच्चों को कहां से आर्थिक सहायता मिलती है. विकलांग प्रमाण पत्र कहां से निर्गत हो सकता है. ताकि भविष्य में सरकारी लाभ मिल सके.अधिवक्ता की सलाह : मूक-बधिर बच्चों को सरकारी सहायता मिलती है. इसकी जानकारी के लिए डीसी कार्यालय के समाज कल्याण विभाग में संपर्क करें. विकलांग प्रमाण पत्र के लिए जिले के सिविल सर्जन कार्यालय में संपर्क करें. बोर्ड के माध्यम से प्रमाण पत्र बनता है.
बोकारो से विनिता कुमारी का सवाल : निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए कौन सी योजना है. इस योजना का लाभ कैसे और कहां से मिलेगा.अधिवक्ता की सलाह : निजी स्कूलों में नामांकन के लिए सरकार की योजना आरटीइ (राइट टू एजुकेशन) चल रही है. इसके तहत ऑनलाइन फार्म उपलब्ध होता है. अधिक जानकारी के लिए शिक्षा विभाग के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है.
बोकारो से विवेक का सवाल : किसी व्यक्ति का वारंट आया हुआ है, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही है. समय का लाभ दे रही है. ऐसे में क्या किया जा सकता है.अधिवक्ता की सलाह : पुलिस का काम वारंटी को पकड़ना है. पुलिस जानबूझ कर अनदेखी कर रही है तो पुलिस के वरीय अधिकारियों को सूचना दें. 100 नंबर पर फोन करके भी जानकारी दे सकते हैं.
