चिकनी मिट्टी से बना टेराकोट डिजाइन की मूर्ति. तलवार, फरसा, फाइटर समेत अन्य हथियार. रेशम की साड़ी, श्री अन्न (मोटा अनाज) से तैयार उत्पाद, जलकुंभी से बना घरेलू उपयोग का सामान… यह सभी देखने को मिला सेक्टर 04 स्थित मजदूर मैदान में. रविवार को यहां तीन दिवसीय बोकारो सखी महोत्सव की शुरुआत हुई. आयोजन में जिला के सभी प्रखंडों के महिला स्वयं सहायता समूहों व अन्य द्वारा 54 स्टॉल लगाये गये हैं.
बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने महोत्सव का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि यह आयोजन महिला स्वयं सहायता समूहों को उत्पाद प्रदर्शित करने व बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण मंच है. इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक सशक्तता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी नयी पहचान मिलेगी. जिला प्रशासन इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है. एसपी हरविंदर सिंह ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक रूप से मजबूत होने से समाज मजबूत होगा. डीडीसी शताब्दी मजूमदार ने कहा कि महोत्सव के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर मिला है. इससे उनकी आय में वृद्धि होगी. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. विशिष्ट अतिथि फिल्मेकर शशि वर्मा ने लोगों से महिलाओं द्वारा बनाये गये उत्पादों को प्रोत्साहित करने व उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने का आह्वान किया. मौके पर जेएसएलपीएस के डीपीएम अनिल डुंगडुंग, चास एसडीओ प्रांजल ढांडा, प्रभाष दत्ता, संदीप शिंदे व अन्य मौजूद थे. महोत्सव में व्यंजनों के भी आधा दर्जन स्टॉल लगाये गये हैं. लोगों ने व्यंजनों का स्वाद भी चखा. बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला व मिक्की माउस की व्यवस्था है.स्टॉल धारकों ने कहा
स्टॉल धारकों ने भी आयोजन की तारीफ की. चंदनकियारी प्रखंड के माडरा गांव की नमिता ने मिट्टी के बर्तनों का स्टॉल लगाया है. उन्होंने कहा कि उत्पाद को लोग पसंद कर रहे हैं. दैनिक जरूरत में यह शामिल भी है. अगर जिला प्रशासन की ओर से केंद्रीत बाजार मिले, तो बहुत लाभ होगा. जरीडीह प्रखंड के भस्की गांव की शोभा ने बताया कि खरीदारों की कमी नहीं है, लेकिन सही बाजार नहीं मिल पाता है. लोग ब्रांड के आगे उत्पाद को कम आंकते हैं. जिला प्रशासन की यह अच्छी कोशिश है.
