नयी दिल्ली में 24 से 28 अप्रैल तक चल रहे चौथे अंतरराष्ट्रीय मलंगिया महोत्सव में बोकारो की सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद के रंगकर्मियों ने मैथिली नाटक ””””एक कमल नोर मे”””” का मंचन किया. इसमें कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना की गयी. वरिष्ठ रंगकर्मी शंभु झा के निर्देशन में मंचित इस नाटक में आधुनिक युग में भी मिथिला की उन महिलाओं की मर्मस्पर्शी गाथा को दर्शाया गया, जो अपने व्यक्तिगत दर्द को भीतर दबा कर परिवार को संजोये रखती हैं. समाज की कुरीतियों का दंश झेलती हैं. मुख्य पात्र माला के माध्यम से एक ऐसी निःसंतान महिला की विडंबना को उजागर किया गया है, जिसे समाज केवल संतान उत्पत्ति का माध्यम मानता है.
इन्होंने निभायी महत्वपूर्ण भूमिक
ानाटक में सुनील मोहन ठाकुर (ज्योतिषी), आशुतोष झा (राजेश), रोहित चंचल (मुकेश), चंद्रकांत मिश्र बुलन (डॉ साहेब), गिरजानंद मिश्र (पम्पू), प्रीति प्रिया (माला) व कस्तूरी सिन्हा (सरस्वती) ने भूमिका निभायी. कृपानंद सिन्हा का विशेष योगदान रहा. परिषद के अध्यक्ष जय प्रकाश चौधरी, महासचिव नीरज चौधरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक सहित सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने बधाई दी. मलंगिया फाउंडेशन की ओर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के संयुक्त तत्वावधान में शफीक सभागार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य व सांस्कृतिक उत्सव के दौरान प्रतिष्ठित लेखक महेंद्र मलंगिया द्वारा लिखित 35 नाटकों का मंचन भारत के विभिन्न जगहों व नेपाल से आये कलाकार कर रहे हैं.
