Bokaro News : बोकारो में टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापना की योजना अधर में

Bokaro News : बोकारो में टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापना की योजना अधर में है.

बोकारो जिला में कई योजनाएं कछुआ की तरह चल कर बाद में खरगोश की तरह सो जाती हैं. ऐसी ही एक योजना है जरीडीह प्रखंड के केंदुआडीह में प्रस्तावित टेक्नोलॉजी सेंटर (टूल्स रूम) के निर्माण की. योजना को लेकर 15 साल बहुत कागजी घोड़े दौड़े. सितंबर 2024 में तत्कालीन केंद्रीय एमएसएमइ मंत्री जीतन राम मांझी ने 250 करोड़ रुपये की इस योजना का ऑनलाइन शिलान्यास किया. लेकिन अभी तक योजना के नाम पर अभी तक सिर्फ बाउंड्री वाल का काम ही शुरू किया गया था. दरअसल, जिस जगह पर सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, वहां से हाइटेंशन बिजली तार गुजरा है. इसके कारण बाउंड्री वाल निर्माण का काम बंद हो गया. परेशान होकर पहले स्थानीय स्तर पर गुहार लगायी गयी. अक्तूबर 2025 में राज्य स्तर पर मामले को पहुंचाया गया. इसके बाद भी कोई पहल नहीं दिख रही है. मालूम हो कि केंद्र सरकार ने देश भर में टूल्स रूम स्थापित करने के लिए 2019 के बजट में प्रावधान किया था. भारत सरकार की ओर से यह रकम खर्च होगी. बताते चले कि सितंबर 2024 में हुए शिलान्यास के बाद दो साल के अंदर निर्माण कार्य पूरा करना था. लेकिन, 18 माह बाद भी कुछ नहीं हुआ है. बोकारो में योजना पूरी हाेने पर यह राज्य का तीसरा टेक्नोलॉजी सेंटर होगा.

20.46 एकड़ जमीन की गयी थी हस्तांतरित

भारत सरकार के मध्यम एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्रालय के माध्यम से जैनामोड़ में टूल्स रूम स्थापित किये जाने को लेकर वर्ष 2020 में एमएसएमइ के सचिव डॉ अरुण कुमार पंडा ने जिला प्रशासन व जियाडा के अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया था. उन्होंने कहा था कि स्थल अच्छा है. बोकारो में इसका लाभ मिलेगा. युवाओं को कौशल प्रशक्षिण के साथ उद्यमियों को भी फायदा मिलेगा. इसके लिए जियाडा को जमीन का प्रस्ताव बना कर भारत सरकार को भेजने का निर्देश दिया था. जैनामोड़ में प्रस्तावित टेक्नोलॉजी सेंटर (टूल रूम) के लिए एक रुपया टोकन बेसिस पर 20.46 एकड़ जमीन ट्रांसफर का आदेश जिला प्रशासन को दिया गया. इसके बाद जमीन का हस्तांतरण किया गया. बता दें कि यह जमीन निदेशालय परियोजना भूमि पुनर्वास की है. यह राज्य उद्योग विभाग के अधीन है.

योजना धरातल पर उतरे तो मिलेगा फायदा

बोकारो जिला औद्योगिक गतिविधि के लिए जाना जाता है. सेल, कोल इंडिया, ओएनजीसी, डीवीसी, वेदांता, इलेक्ट्रोस्टील समेत कई कंपनियों के अलावा एमएसएमइ (माइक्रो, स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइज) की 490 से ज्यादा इकाईयां रजिस्टर्ड हैं. टेक्नॉलोजी सेंटर के बनने से छोटे-बड़े उद्यमियों को फायदा होगा. दरअसल, टूल्स रूम में सभी तरह की मशीनें होती हैं, जिसका इस्तेमाल कारोबारी कर सकते हैं. बताते चले कि जियाडा क्षेत्र में स्थित इकाईयों में सीएनसी (कंप्यूटराइज न्यूमेरिकल कंट्रोल) मशीन, हाइटेक कैलीबरेशन, मेटल टेस्टिंग, रि-हिटिंग जैसी सुविधा नहीं है. मेटल टेस्टिंग के लिए कारोबारी को कोलकाता जाना होता है.

2000 युवाओं को मिलेगा रोजगार

टूल्स रूम बनने रोजगार के लिहाज से भी फायदेमंद होगा. इससे युवा प्रशिक्षित भी होंगे. आठवीं पास से लेकर आइटीआइ, इंजीनियरिंग ग्रेजुएट, स्नातक व डिप्लोमा आदि के पाठ्यक्रम भी शामिल किये जा सकते हैं, इससे प्रशिक्षुओं के लिए रोजगार के अवसर खुलते. प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1500 से 2000 युवाओं को रोजगार मिलेगा. मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष शशिभूषण ने कहा कि शिलान्यास के बाद से ही हाइटेंशन तार हटाने को लेकर विभागीय पहल की जा रही है. लेकिन, सुनवाई नहीं हो रही है. इसके कारण बाउंड्री वाल का कार्य रोक दिया गया. एमएसएमइ मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार को बिजली लाइन हटाने के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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Published by: Janak singh choudhary

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