Bokaro News : बोकारो में जल जीवन मिशन की रफ्तार धीमी

Bokaro News : बोकारो में जल जीवन मिशन की रफ्तार धीमी है.

बोकारो में गर्मी का असर दिखने लगा है. अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. जगह-जगह से पेयजल समस्या देखी जा रही है. जिला प्रशासन इसको लेकर पहल करने लगा है. दूसरी ओर जल जीवन मिशन की सुस्त रफ्तार बोकारो की प्यास को ज्यादा बेकरार कर रहा है. जल जीवन मिशन पर जिला का भविष्य भी टिका है. कारण यह कि डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स 2025 की रिपोर्ट के अनुसार जिला में 9958.02 एचएएम शुद्ध भूजल बचा है. इसमें हर साल बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है.

जल जीवन मिशन के तहत बोकारो जिला में 3,16,589 घरों में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य है. 15 अगस्त 2019 से यानी लगभग सात साल में अब तक 1,58,816 घरों में कनेक्शन मिला है. योजना के शुरुआत के समय ही 21148 घरों नल से जल पहुंच रहा था. चिंता यह है कि जिला में हर घर को योजना से जोड़ने की कार्यगति बढ़ने के बजाय धीमी हो रही है. 2022 में में बोकारो जिला राज्य में तीसरे स्थान पर था. लेकिन, वर्तमान में 15वें स्थान पर आ गया. वित्तीय वर्ष 2025-26 में मात्र 912 घरों में कनेक्शन दिया गया है.

लक्ष्य पूरा करने की चुनौती

केंद्र सरकार ने दिसंबर 2028 तक योजना की डेट लाइन बढ़ा दी है. हालांकि, पहले दिसंबर 2024 ही डेटलाइन थी. अब दो साल से कम समय में लगभग 50 प्रतिशत घर को योजना से जोड़ना है. योजना को लेकर केंद्र व राज्य के बीच आर्थिक खींचातानी भी चल रही है. ईरान-इजरायल युद्ध के कारण सफ्लाई चैन गड़बड़ाने से डॉक्टाईल पाइप के निर्माण में भी असर पड़ने का अंदेशा है.

साल दर साल कम होती गयी रफ्तार

योजना के शुरुआत से साल दर साल काम की रफ्तार धीमी होती गयी. वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2862, 2020-21 में 44495, 2021-22 में 39980, 2022-23 में 26736, 2023-24 में 20345 और वित्तीय वर्ष 2024-25 में मात्र 2338 घरों को कनेक्शन दिया गया है.

भूजल बचाने के लिए कारगर है मिशन

जल जीवन मिशन भूजल बचाने के लिए कारगर है. कारण है कि योजना से हर घर को समुचित पेयजल पाइपलाइन से मिलेगा. साथ ही जल प्रबंधन भी होगा. पारंपरिक रूप से जल का उपयोग करने से पानी की बर्बादी होती है. कम इस्तेमाल होने के बाद भी लोग ज्यादा पानी का दोहन करते हैं. बोरिंग व चापाकल का अत्याधिक इस्तेमाल से भूमिगत जल का संरक्षण भी नहीं हो पाता है. ऐसे में इस योजना के सही रूप में लागू हो जाने से कई समस्या का एक साथ निदान हो सकेगा. इस योजना से उन गांव तक भी पेयजल पहुंचाना है, जहां जल का कोई स्रोत नहीं है. बोकारो जिला में मिशन का ज्यादातर हिस्सा दामोदर नदी से जुड़ा है, इसके कारण भूजल का दोहन कम होगा.

19 गांव योजना में नहीं है शामिल

बोकारो संभवत देश का एक मात्र जिला होगा, जहां के 19 गांवों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है. ये विस्थापित व पुनर्वासित गांव हैं. इन गांव में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू होने के कारण इन्हें राजस्व गांव का दर्जा प्राप्त नहीं है. लेकिन, इन गांव में लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी निवास करते आ रहे हैं. इन गांवों में 50 हजार से अधिक की आबादी रहती है.

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By JANAK SINGH CHOUDHARY

JANAK SINGH CHOUDHARY is a contributor at Prabhat Khabar.

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