सिक्की कला को मिलेगा रोजगार का रंग, पिंड्राजोरा में 30 महिलाओं ने सीखा हुनर; पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

झारखंड की 30 महिलाओं को पारंपरिक सिक्की कला में प्रशिक्षित किया गया है. IIT ISM धनबाद द्वारा आयोजित इस पांच दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार और बेहतर आजीविका के अवसर प्रदान करना है. यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

झारखंड की पारंपरिक सिक्की कला को आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से पिंड्राजोरा में आयोजित पांच दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ. प्रशिक्षण में पिंड्राजोरा और आसपास के क्षेत्रों की 30 महिलाओं ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक सिक्की कला के संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया.

आइआइटी आइएसएम धनबाद की ओर से आयोजित हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम का आयोजन इआइएसीपी प्रोग्राम सेंटर (आरपी), पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग, आइआइटी आइएसएम धनबाद की ओर से झारखंड फाउंडेशन केंद्र के सहयोग से किया गया. यह कार्यक्रम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित हुआ. प्रशिक्षण का विषय ‘सिक्की कला : सतत आजीविका एवं सांस्कृतिक संरक्षण’ रखा गया था.

सिक्की कला की तकनीकों और उत्पाद निर्माण की जानकारी

पांच दिनों के प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को सिक्की कला की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया गया. उन्हें सिक्की से अलग-अलग हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने की विधियों के साथ उत्पादन प्रक्रिया के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को अपने पारंपरिक हुनर को आय के स्रोत में बदलने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक कौशल को व्यवस्थित रूप से विकसित करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, प्रशिक्षित महिलाएं सिक्की उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार कर आजीविका के अवसर तलाश सकती हैं.

बाजार उपलब्ध कराने और उद्यमिता से जोड़ने पर जोर

समापन समारोह में मुख्य अतिथि रासु देवी, डॉ. जयदेव कुमार महतो सहित अन्य अतिथियों ने प्रशिक्षणार्थियों के बीच प्रमाण पत्र वितरित किये. रासु देवी ने कहा कि पारंपरिक हस्तशिल्प ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का प्रभावी माध्यम बनने के साथ सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

डॉ. जयदेव कुमार महतो ने सिक्की कला को संरक्षित करने के साथ इसे ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता बतायी. उन्होंने सिक्की से तैयार उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने तथा महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया. उनका कहना था कि प्रशिक्षण के बाद उत्पाद निर्माण के साथ उनके विपणन और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है.

प्रशिक्षण से स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद

आयोजकों ने कहा कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण से प्रतिभागी महिलाओं को अपने कौशल को बेहतर बनाने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी. पारंपरिक सिक्की कला के संरक्षण के साथ इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नये अवसर विकसित करने की संभावना भी बढ़ेगी.

समापन समारोह में पूर्व मुखिया गोरा चांद महतो, बिस्वाजीत कुमार, धीरेन्द्र नाथ महतो, अंगद कुमार और दीपक कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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By Brahm deo dubey

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