किशोरियों व गर्भवती महिलाओं में समय पर पकड़े जाएंगे सिकल सेल-थैलेसीमिया के मामले

किशोरियों व गर्भवती महिलाओं में आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियों, जैसे सिकल सेल और थैलेसीमिया, की समय पर पहचान और उपचार के लिए 'प्रोजेक्ट स्वास्थ्य' के तहत एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई. शुरुआती स्क्रीनिंग और नियमित जांच इन गंभीर बीमारियों से जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

किशोरियों व गर्भवती महिलाओं में आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘प्रोजेक्ट स्वास्थ्य’ के तहत शुक्रवार को सेक्टर वन स्थित हंस रीजेंसी में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन डीसी अजय नाथ झा, डीडीसी शताब्दी मजमुदार, सहायक समाहर्ता डॉ अरविंद राधाकृष्णन, सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद, जपाइगो के डॉ कुलभूषण सिंह, कोल इंडिया प्रतिनिधि संजीत कुमार, विकास सारथी के सचिव रंजन कुमार और जन जागरण के सचिव संजय सिंह ने संयुक्त रूप से किया.

समय पर पहचान से सुरक्षित हो सकता है मरीजों का जीवन : डीसी

डीसी अजय नाथ झा ने कहा कि सिकल सेल और थैलेसीमिया गंभीर आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियां हैं. इनकी समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय परामर्श से मरीजों के जीवन को सुरक्षित बनाया जा सकता है. विशेष रूप से किशोरियों और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच इन बीमारियों की पहचान और रोकथाम की दिशा में प्रभावी कदम है.

बीमारी की स्थिति में चिकित्सक के संपर्क में रहें मरीज

सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि सिकल सेल और थैलेसीमिया आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियां हैं. बीमारी से पीड़ित मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से प्रभावित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना आसान होता है.

शुरुआती स्क्रीनिंग पर दिया गया जोर

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की शुरुआती स्क्रीनिंग तथा प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना रहा. इस दौरान विशेषज्ञों ने बीमारी के कारण, लक्षण, जांच की वैज्ञानिक प्रक्रिया और स्क्रीनिंग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

अधिक से अधिक लोगों को स्क्रीनिंग से जोड़ने पर चर्चा

कार्यशाला में इन आनुवंशिक बीमारियों की प्रभावी रोकथाम और व्यापक जागरूकता फैलाने को लेकर चर्चा हुई. साथ ही अधिक से अधिक पात्र लोगों को स्क्रीनिंग प्रक्रिया से जोड़ने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया. कार्यक्रम में किशोरियों और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही गयी.


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By Ranjeet kumar

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