सीपी सिंह, बोकारो
बोकारो में इस साल मानसून अबतक दगा दे रही है. खबर यह नहीं है. खबर यह है कि अभी से आने वाले दिनों में जितनी भी बारिश हो, उस बारिश के पानी को शत प्रतिशत बचाने की दिशा में पहल करें. अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2030 आते-आते लोग भूगर्भ के संचित शुद्ध जल के बूंद-बूंद के लिए तरसेंगे. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि भारत सरकार की डायनेमिक अंडर ग्राउंड वाटर रिपोर्ट-2025 बता रही है. जिला में भविष्य के इस्तेमाल के लिए मात्र 9958.02 एचएएम शुद्ध जल बचा हुआ है. अगर इसी तरह भूगर्भ जल का दोहन होता रहा तो 2030 तक मात्र 4594.96 एचएमए शुद्ध जल का आवंटन ही हो पायेगा.
बोकारो लिए चिंता का एक ओर कारण, लगातार हो रहा भूजल का दोहन भी है. रिपोर्ट की माने तो दो साल में भूगर्भ जल में 2543.00 एचएएम शुद्ध जल की कमी आयी है. वहीं दोहन 7.5 प्रतिशत बढ़ गया है. 2023 की रिपोर्ट के अनुसार जिला में भविष्य उपयोग के लिए मात्र 12501.03 एचएएम शुद्ध भूजल बचा था. इससे पहले 2022 की रिपोर्ट के अनुसार जिला में 20653.26 एचएएम भविष्य उपयोग के लिए था. 2023 की रिपोर्ट में भूजल दोहन का चरण बढ़कर 42 प्रतिशत था, जो 2025 की रिपोर्ट में 49.45 प्रतिशत हो गया. 2021 में यह मात्र 30 प्रतिशत ही था. यानी सालों साल दोहन बढ़ रहा है.
सभी योजना पर भारी पड़ रहा है दोहन
अंडर ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए सरकार की ओर से कई स्तर पर योजना चलाया जा रहा है. घरेलू निर्माण से लेकर सार्वजनिक निर्माण में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जा रहा है. विभिन्न विभाग की ओर से तालाब, डोभा व अन्य निर्माण किया जा रहा है. लेकिन, बोकारो जिला में अंडर ग्राउंड वाटर रिचार्ज नहीं हो रहा है. जिला में 20545.57 एचएएम भूजल ही रिचार्च हुआ है. जबकि 2023 में 22520.76 एचएएम भूजल रिचार्ज हुआ था. यानी दो साल में 1975.19 एचएएम की कमी आयी है. वहीं 2022 में यह आंकड़ा 31507.50 एचएएम था.
2025 की रिपोर्ट की माने तो मानसून के मौसम में बारिश से 15774.46 एचएएम (यूनिट) व अन्य स्त्रोत से 1595.77 यूनिट भूजल रिचार्ज हुआ. वहीं अन्य मौसम में होने वाली बारिश से 1993.99 यूनिट व अन्य स्त्रोत से 1181.35 यूनिट भूजल रिचार्ज हुआ है. वहीं प्राकृतिक रूप से 1960.87 यूनिट पानी डिस्चार्ज हुआ है.
दिनचर्या में पानी का ज्यादा हो रहा है खपत
एक आम आदमी के दैनिक जरूरत (नहाने-खाने समेत अन्य) के लिए 60 से 80 लीटर पानी की जरूरत होती है. लेकिन, इस्तेमाल 100-120 लीटर पानी का होता है. यही आदत पानी के बर्बादी का कारण बन रहा है. बोकारो औद्योगिक रूप से धनी जिला है. लेकिन, पानी का खपत सबसे अधिक घरेलू उपयोग में होता है. जबकि, जिला में 33 हजार हेक्टेयर में अधिकतम जल उपयोग वाले धान फसल की खेती भी होती है. रिपोर्ट की माने तो घरेलू उपयोग में 45.63.81 यूनिट भूजल की खपत हो रही है. औद्योगिक इस्तेमाल में 2213.91 यूनिट व कृषि कार्य में 2413 यूनिट भूजल का इस्तेमाल हो रहा है.
भूजल दोहन में 07वें स्थान पर है बोकारो, धनबाद नंबर एक
भूजल दोहन के मामले में बोकारो जिला का स्थान प्रदेश में 07वें स्थान पर है. जिला में 49.45 प्रतिशत भूजल का दोहन हो रहा है. वहीं देवघर जिला में 54.42 प्रतिशत, धनबाद में 74.64 प्रतिशत, जामताड़ा में 46.81 प्रतिशत, कोडरमा में 62.72 प्रतिशत और रामगढ़ 62.03 प्रतिशत भूजल का दोहन हो रहा है. भूजल दोहन मामले में धनबाद जिला प्रदेश में नंबर एक स्थान पर है.
बेरमो प्रखंड में स्थिति बदत्तर, तीन प्रखंड में पाया गया है फ्लोराईड
रिपोर्ट जिला के सभी 09 प्रखंड के आधार पर बनाया गया है. जिला का बेरमो प्रखंड भूजल का अति शोषण करता है. वहीं अन्य सभी प्रखंड सेफ जोन में आते हैं. जिला में 2624.43 वर्ग किलोमीटर में बारिश का पानी या अन्य जल स्रोत रिसकर जमीन के अंदर जाता है. भूजल स्तर बढ़ाता है. इनमें से 96.47 प्रतिशत भूमि यानी 2531.73 वर्ग किमी में पानी आसानी से चला जाता है, जबकि 92.7 वर्ग किमी में पानी आसानी से नहीं रिसता है. भूजल गुणवत्ता की बात करें तो जिला का तीन प्रखंड का भूजल पेयजल के लिहाज से अच्छा नहीं माना जा सकता है. जिला के चास, गोमिया व पेटरवार प्रखंड के भूजल में फ्लोराईड की मात्रा पायी गयी है.
