Bokaro News : हर समस्या का समाधान कोर्ट नहीं, बातचीत भी है रास्ता

Bokaro News : छोटी-छोटी समस्याओं में तुरंत कोर्ट का सहारा नहीं लेना चाहिए.

जमीन विवाद, मारपीट, घरेलू हिंसा जैसी छोटी-छोटी समस्याओं में तुरंत कोर्ट का सहारा नहीं लेना चाहिए. पहले इन्हें सामाजिक स्तर पर सुलझाने का प्रयास करना जरूरी है. संभव हो तो किसी मध्यस्थ की मदद लेनी चाहिए. इससे मामला जल्दी सुलझ सकता है और आपसी संबंध भी अच्छे बने रहते हैं. बातचीत के माध्यम से कई गंभीर विवाद भी सुलझाये जा सकते हैं. कई लोग छोटे-छोटे मामलों में सीधे कोर्ट चले जाते हैं, जिससे वर्षों तक केस चलता रहता है और न्यायालयों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है. ऐसे मामलों में पहले सामाजिक स्तर पर समाधान खोजने की कोशिश करनी चाहिए. साथ ही, लोगों को कानूनी रूप से जागरूक होना भी आवश्यक है. यह बातें रविवार को प्रभात खबर ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग में बोकारो सिविल कोर्ट के वरीय अधिवक्ता जवाहर प्रसाद ने पाठकों के सवालों के जवाब में कही.

पाठकों के सवाल और दिये गये

सलाह

प्रभाकर सिंह, गिरिडीह : घर में जमीन का बंटवारा करना चाहता हूं. क्या आपसी समझौता पर्याप्त है या कागजी प्रक्रिया जरूरी है? सलाह : आपसी सहमति के बाद भी कानूनी दस्तावेज जरूर बनवायें. इससे भविष्य में विवाद की आशंका कम होती है और आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहती है. संजय कुमार, कोडरमा : मेरा जमीन विवाद एसडीएम कोर्ट में चल रहा था और मुझे न्याय मिल गया है. अब विरोधी पक्ष फिर से केस करना चाहता है. क्या यह संभव है? सलाह : कोई भी व्यक्ति कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र है. यदि फैसला आपके पक्ष में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. अपने कागजात मजबूत रखें, न्याय आपको ही मिलेगा. संजय साव, धनबाद : मैंने एक व्यक्ति को एक लाख रुपये उधार दिये थे. उसने चेक दिया, लेकिन वह बाउंस हो गया. अब क्या करूं? सलाह : पहले आपसी समझौते से हल निकालने की कोशिश करें. अगर बात नहीं बने, तो कोर्ट जायें. आपका पैसा आपको जरूर मिलेगा. विवेक कुमार यादव, बोकारो : मेरे फोन-पे से अचानक पैसे कट रहे हैं. क्या करना चाहिए? सलाह : साइबर थाने में शिकायत दर्ज करायें. साथ ही, ऐप और मोबाइल की जांच करें और जरूरत हो तो फोन को रीसेट कर दोबारा इंस्टॉल करें. संजय प्रकाश, गोमिया : क्या पुलिस अधिकारी बिना कारण गाली-गलौज कर सकता है? सलाह : किसी को भी ऐसा करने का अधिकार नहीं है. उच्च अधिकारियों से शिकायत करें. जरूरत पड़े तो कोर्ट जायें. संजय पासवान, बोकारो : जमीन छोटे बेटे के नाम है, लेकिन बड़े बेटे के पुत्र ने उसे बेच दिया. क्या जमीन वापस मिल सकती है?

सलाह :

जमीन वही बेच सकता है, जिसके नाम पर है. गलत तरीके से बिक्री हुई है तो कोर्ट में आवेदन करें.

मो सलाम, बोकारो :

सरकारी कर्मचारी के खिलाफ केस किया, लेकिन 15 महीने से कार्रवाई नहीं हुई. अब क्या करें?

सलाह :

ऐसी स्थिति में कोर्ट का सहारा लें और सभी साक्ष्य प्रस्तुत करें. कार्रवाई जरूर होगी.

प्रकाश सक्सेना, सिंदरी :

पड़ोसी मेरी जमीन पर दावा कर रहे हैं और कागज दिखा रहे हैं, लेकिन हमारे पास दस्तावेज नहीं है.

सलाह :

कोर्ट से डीड की प्रमाणित प्रति निकलवायें और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करें.

विशेश्वर मंडल, गिरिडीह :

पिता ने दूसरी शादी की है और संपत्ति बेच दी है. अब मेरी जमीन भी बेचना चाहते हैं. क्या करूं?

सलाह :

अगर जमीन दादा के नाम की थी, तो बिक्री रद्द हो सकती है. आपकी खरीदी जमीन कोई और नहीं बेच सकता. कागजात के साथ कोर्ट जायें.

विवेक प्रजापति, धनबाद :

स्कूटी खराब निकली. उपभोक्ता फोरम में केस किया, लेकिन तीन साल से फैसला नहीं आया. क्या करें?

सलाह :

फोरम के अध्यक्ष से मिल कर मामले की जानकारी लें. संभव है कुछ प्रक्रिया बाकी हो. सही जानकारी के बाद न्याय जरूर मिलेगा.

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By Janak singh choudhary

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