Bokaro News : बोकारो थर्मल स्थित राजा बाजार निवासी स्व. मो मासूक एवं स्व. जमीला खातून का 35 वर्ष से लापता पुत्र मो महबूब आलम (50 वर्ष) बुधवार को अचानक अपने घर पहुंच गये. अपनों के बीच पाकर जहां महबूब सहित घर के सभी सदस्यों की आंखों से आंसू झलक पड़े, वहीं दूसरी ओर महबूब को इस बात का मलाल रहा कि बीते 35 वर्षों के दरम्यान उसके अब्बू एवं अम्मी नहीं रहे. बेटे के लौट आने की उम्मीद में दोनों का इंतकाल हो चुका था. महबूब 15 वर्ष की ही उम्र में अपने घर से अब्बू एवं अम्मी को दिल्ली में रहनेवाले अपने चाचा के पास जाने की बात कहकर वर्ष 1990 में घर से निकला था, परंतु वह दिल्ली अपने चाचा के पास नहीं जाकर मुंबई कमाने चला गया. मुंबई जाकर वह नरीमन प्वाइंट स्थित बिरयास रेस्टोरेंट में काम करने लगा. राजा बाजार निवासी समाजसेवी मंजूर आलम के पूछे जाने पर महबूब ने बताया कि बीते पैंतीस वर्षों में कई बार अपने अब्बू–अम्मी एवं भैया सहित अन्य परिजनों की याद आती थी तो घर जाने का दिल करता था, परंतु चाहकर भी घर नहीं लौट पाया. इस बीच डीवीसी के को-ऑपरेटिव बस में बतौर चालक का कार्य करनेवाले महबूब केअब्बू मो मासूक उर्फ खान साहब का 2001 में तथा अम्मी जमीला खातून का इंतकाल वर्ष 2011 में हो गया.
माता-पिता के नहीं रहने का है गम :
महबूब का कहना है कि एक ओर घर लौट आने की खुशी हो रही है तो दूसरी ओर माता–पिता के नहीं रहने का गम भी है. कहा कि उसे उम्मीद नहीं थी कि वे दोनों अब नहीं होंगे. महबूब की भाभी आबदा खातून, भैया मो मतलू अहमद एवं भतीजी तरन्नुम परवीन का कहना है कि सही मायने में रमजान के पाक महीने में उन्हें ऊपरवाले ने खुशी दी है. इस बार की ईद भी सभी के साथ मनाने का एक अलग ही आनंद होगा.21 वर्षों से लापता है एक और भाई :
महबूब का एक और भाई मो मुमताज वर्ष 2003 से लापता है और उसकी भी कोई खोज खबर आज तक परिजनों को नहीं मिली है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
