Bokaro News : प्रतिनिधि, गांधीनगर. सीसीएल के बीएंडके एरिया अंतर्गत मेगा प्रोजेक्ट खासमहल कोनार (एकेके ओसीपी) में जमीन की कमी के कारण कोयला उत्पादन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. यदि जल्द ही विस्थापन और जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है. फिलहाल डीवीसी की 33 हजार वोल्ट टावर लाइन के स्थानांतरण के बाद उत्पादन में कुछ तेजी आयी है, लेकिन माइंस विस्तार के लिए आवश्यक जमीन नहीं मिलने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. खासकर बरवाबेड़ा गांव और दरगाह मोहल्ला का विस्थापन प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. जानकारी के अनुसार, बरवाबेड़ा गांव के विस्थापन की प्रक्रिया पिछले लगभग छह वर्षों से चल रही है. गोविंदपुर फेज-टू में पुनर्वास स्थल लगभग तैयार है, फिर भी शिफ्टिंग का कार्य पूरा नहीं हो सका है. वहीं, दरगाह मोहल्ला के पास हॉल रोड निर्माण के लिए जमीन नहीं मिलने से भी उत्पादन कार्य बाधित हो रहा है. जमीन की कमी के चलते इस वर्ष परियोजना का उत्पादन लक्ष्य घटाकर लगभग 50 लाख टन कर दिया गया है. उल्लेखनीय है कि करीब तीन दशक पुरानी इस परियोजना से लोकल सेल के साथ-साथ ट्रांसपोर्टिंग के जरिये हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है. ऐसे में परियोजना का सुचारू संचालन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है. इधर, नये परियोजना पदाधिकारी सुमेधानंदन ने कहा कि महाप्रबंधक संजय कुमार झा के मार्गदर्शन में सभी समस्याओं के समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है. साथ ही ग्रामीण रैयतों और श्रमिक प्रतिनिधियों से सहयोग की अपील की गयी है, ताकि परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके.
Bokaro News : जमीन की कमी से एकेके ओसीपी का माइंस विस्तार प्रभावित
Bokaro News : बरवाबेड़ा व दरगाह मोहल्ला का विस्थापन बना प्रबंधन के लिए चुनौती
