भुनेश्वर महतो के 39वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि

झारखंड अलग राज्य आंदोलन के शहीद भुनेश्वर महतो का 39वां शहादत दिवस फुसरो में मनाया गया. इस दौरान आंदोलन के मूल उद्देश्यों, स्थानीय लोगों के अधिकारों और खनिज संपदा के दोहन पर चिंता जताई गई.

झारखंड अलग राज्य आंदोलन के शहीद भुनेश्वर महतो का 39वां शहादत दिवस शनिवार को फुसरो के रानीबाग में मनाया गया. कार्यक्रम का आयोजन झारखंड मुक्ति मोर्चा उलगुलान की ओर से किया गया. इस दौरान पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शहीद भुनेश्वर महतो की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया.

अलग राज्य आंदोलन में शहादत को किया याद

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झामुमो उलगुलान के नेता कृष्णा थापा और शंभूनाथ महतो ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा की कथित लूट रोकने और स्थानीय लोगों को नौकरी, रोजगार व सम्मान दिलाने के उद्देश्य से अलग राज्य आंदोलन को आगे बढ़ाया गया था. वक्ताओं ने कहा कि स्व. बिनोद बिहारी महतो, कॉमरेड एके राय और स्व. शिबू सोरेन ने लाल-हरा मैत्री के नारे के साथ आंदोलन को संगठित रूप दिया.

उन्होंने कहा कि अलग राज्य आंदोलन में बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों ने शहादत दी, जिनमें भुनेश्वर महतो भी शामिल थे. वक्ताओं ने उनके संघर्ष और योगदान को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

1987 में हुई थी भुनेश्वर महतो की शहादत

वक्ताओं के अनुसार, भुनेश्वर महतो ने वर्ष 1987 में शहादत दी थी. इसके बाद झामुमो उलगुलान के केंद्रीय महासचिव और तत्कालीन झामुमो नेता बेनीलाल महतो की पहल पर फुसरो में उनके शहादत दिवस के आयोजन की परंपरा शुरू हुई. उन्होंने बताया कि दूसरे शहादत दिवस के अवसर पर स्व. बिनोद बिहारी महतो, स्व. शिबू सोरेन, स्व. शिवा महतो, फूलचंद सोरेन, अक्षयवर शर्मा, काली ठाकुर और रतनलाल गौंड समेत कई आंदोलनकारी शामिल हुए थे.

आंदोलन के उद्देश्यों को लेकर जतायी चिंता

वक्ताओं ने कहा कि आंदोलनकारियों के संघर्ष और शहादत के बाद झारखंड अलग राज्य का गठन हुआ, लेकिन उनकी नजर में स्थानीय लोगों की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया. उन्होंने खनिज संपदा के दोहन से जुड़े मुद्दों और स्थानीय लोगों के रोजगार व सम्मान का सवाल उठाया.

कार्यक्रम में पुलिस-प्रशासन पर स्थानीय लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया गया. वक्ताओं ने डुमरी विधायक जयराम महतो से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई की गयी, तो झारखंड आंदोलन की तर्ज पर व्यापक आंदोलन किया जायेगा. यह वक्ताओं की ओर से व्यक्त राजनीतिक चेतावनी थी.

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By Akash karmakar

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