Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड उच्च न्यायालय ने बोकारो की एक 18 वर्षीय युवती के रहस्यमय ढंग से लापता होने से संबंधित ‘हेवियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई की. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के अधिवक्ता को अगली सुनवाई में डीएनए (DNA) टेस्ट की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जून 2026 की तिथि निर्धारित की है.
कंकाल से होगा माता-पिता के डीएनए का मिलान
सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि लापता युवती के माता-पिता का डीएनए सैंपल एम्स (AIIMS) देवघर में लिया जा चुका है. वर्तमान में, इन सैंपलों को मिलान के लिए कोलकाता स्थित सीएफएसएल (CFSL) भेजा गया है. दरअसल, बोकारो में एक नर कंकाल बरामद हुआ है, जिसके बारे में संदेह है कि वह लापता युवती का हो सकता है. वैज्ञानिक पुष्टि के लिए इस कंकाल के डीएनए का मिलान उसके माता-पिता के सैंपल से किया जा रहा है. केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि इस पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया और रिपोर्ट तैयार होने में लगभग 20 दिनों का समय लगने की संभावना है.
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अदालत में हाजिर हुए बोकारो एसपी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देशों के आलोक में बोकारो के एसपी और पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए. अदालत ने पुलिस और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस गुत्थी को जल्द सुलझाएं.
क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि बोकारो की यह 18 वर्षीय युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है. काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका सुराग नहीं मिला, तो उसकी मां ने हाईकोर्ट में हेवियस कॉर्पस याचिका दायर कर अपनी बेटी को खोजने की गुहार लगाई. इस संबंध में बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या-147/2025 दर्ज है. पुलिस द्वारा बरामद किए गए नर कंकाल ने इस मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है, जिसकी वास्तविकता अब केवल डीएनए रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो पाएगी.
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