बोकारो. सतत इस्पात उत्पादन व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) ने शुक्रवार को अत्याधुनिक ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) डैशबोर्ड की शुरुआत की. यह डिजिटल प्लेटफॉर्म संयंत्र के विभिन्न उत्पादन इकाइयों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की निगरानी, विश्लेषण व प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. डैशबोर्ड का उद्घाटन बीएसएल निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन ने किया. सेल पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग के अधिशासी निदेशक सहित बीएसएल के अधिशासी निदेशक, वरीय अधिकारी व तकनीकी सहयोगी संस्था सेंट्रा वर्ल्ड, बेंगलुरु के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
बीएसएल की डी-कार्बोनाइजेशन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास) ने बताया कि यह पहल बीएसएल की डी-कार्बोनाइजेशन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. उन्होंने बताया कि इआरपी/एसएपी आधारित यह डैशबोर्ड संयंत्र की प्रमुख उत्पादन इकाइयों-सिंटर प्लांट, कोक ओवन, ब्लास्ट फर्नेस, स्टील मेल्टिंग शॉप तथा रोलिंग मिलों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग वास्तविक समय में विश्लेषण व निगरानी करेगा. साथ ही यह उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर वैज्ञानिक व डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायक होगा. यह डैशबोर्ड एम/एस सेंट्रा वर्ल्ड, बेंगलुरु द्वारा बोकारो इस्पात संयंत्र की तकनीकी समिति एवं सेल के पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग, कोलकाता के सहयोग से विकसित किया गया है.
डी-कार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में निभायेगा महत्वपूर्ण भूमिका
डैशबोर्ड में जीएचजी प्रोटोकॉल, वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन की कार्यप्रणाली, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म व कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों का उपयोग किया गया है. यह प्रणाली इआरपी/एसएपी से प्रतिदिन उत्पादन संबंधी आंकड़े स्वतः प्राप्त कर संयंत्र के कार्बन फुटप्रिंट का सटीक आकलन करती है. निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन ने कहा : डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग बीएसएल की पर्यावरणीय उत्कृष्टता व डी-कार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. उन्होंने इस परियोजना को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विभागों व टीमों की सराहना की.
बीएसएल की हरित व सतत इस्पात उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि
जीएचजी डैशबोर्ड की शुरुआत बोकारो इस्पात संयंत्र की हरित व सतत इस्पात उत्पादन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सेल की दीर्घकालिक सतत विकास रणनीति व भारत के जलवायु लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करेगा.
