राकेश वर्मा, बेरमो : सीसीएल के कथारा एरिया की विभिन्न यूनिटों में कार्यरत 232 सिक्यूरिटी गार्डों को वर्ष 2016 व 2017 और स्वांग व कथारा वाशरी में कार्यरत 159 क्लीनिंग मजदूरों को वर्ष 2016 में काम से बैठा दिया गया था. पिछले आठ में कई आंदोलनों के बाद भी इनकी की पुनर्बहाली की मांग पूरी नहीं हुई. अब तो काम से बैठाये लोगों ने आस भी लगभग छोड़ दी है. जानकार बताते हैं कि पिछले आठ साल के दौरान सीसीएल के कथारा एरिया में लगभग एक हजार लोग काम से बैठाये गये. इसमें प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्ड, क्लीनिंग मजदूर के अलावा ठेका मजदूर व लोकल सेल में कार्यरत लदनी मजदूर शामिल हैं. काम से बैठाये गये इन लोगों के समर्थन में कई आंदोलन भी हुए. कई यूनियनों व राजनीतिक दलों ने भी समय-समय पर इस मामले को उठाया, लेकिन सफलता नहीं मिली. डीजीआर (भूतपूर्व सैनिकों की संस्था) के मातहत 232 प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्ड कथारा एरिया की विभिन्न यूनिटों में कार्यरत थे. 10-15 साल तक काम कर चुके इन लोगों में से 116 को 18 नवंबर 2016 तथा 116 को 17 नवंबर 2017 में अचानक काम से बैठा दिया गया. सूत्रों के अनुसार डीजीआर कंपनी द्वारा नाॅमर्स का पालन नहीं करने तथा अनियमितता के कारण विजिलेंस व सीबीआइ की अनुशंसा पर इनके प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्डों को पूरे कोल इंडिया में काम से बैठा दिया गया था. इसी आधार पर कथारा एरिया में भी प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्डों के अनुमोदन को रद्द कर दिया गया था. कथारा वाशरी से 117 तथा स्वांग वाशरी के 59 क्लीनिंग मजदूरों को 25 नवंबर 2017 को अचानक काम से बैठा दिया गया. इसके अलावा कथारा एरिया के कैप्टिव पावर प्लांट (सीपीपी) बंद होने के बाद यहां कार्यरत लगभग दो सौ ठेका मजदूरों के अलावा सीपीपी को चला रही इम्पीयिरल फास्टनर्स कंंपनी के मातहत काम कर रहे सैकड़ों लोगों को काम से बैठा दिया गया. कथारा एरिया की विभिन्न परियोजनाओं में चलने वाले कोयले के लोकल सेल में पेलोडर से कोयला लदाई होने के कारण सैकड़ों लदनी मजदूर भी बेरोजगार हो गये. कथारा वाशरी व कोलियरी के रिजेक्ट व स्लरी मिला कर तकरीबन 700-800 लदनी मजदूर कार्यरत थे.
आंदोलनों की है लंबी फेहरिस्त
काम से बैठाये गये 232 प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्डों तथा 159 क्लिनिंग मजदूरों की पुनर्बहाली की मांग को लेकर आंदोलनों की लंबी फेहरिस्त है. दो दिसंबर 2016 को कथारा महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष झारखंड प्रदेश असंगठित मजदूर कांग्रेस (इंटक) के बैनर तले बेमियादी भूख हड़ताल शुरू की गयी. पांच दिनों के बाद प्रबंधन के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित किया गया. इसके बाद तीन बार पूरे कथारा एरिया में चक्का जाम आंदोलन किया गया. 15 अगस्त 2017 को कथारा जीएम ऑफिस से सटे कथारा फुटबॉल मैदान के समक्ष अर्धनग्न प्रदर्शन किया गया. इसी बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे झारखंड प्रदेश असंगठित मजदूर कांग्रेस (इंटक) के नेता संतोष आस को यूनियन से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद काम से बैठाये गये सभी मजदूर भारतीय मजदूर संघ के शरण में चले गये तथा तत्कालीन गिरिडीह सांसद रवींद्र कुमार पांडेय की अगुवाई में बीएमएस से संबंध सीसीएल कोलियरी कर्मचारी संघ के बैनर तले नये सिरे से इस आंदोलन शुरू किया गया. पूर्व सांसद पुनर्बहाली का मामला कई बार संसद में उठाया. सीसीएल के सीएमडी तथा कोल इंडिया के तत्कालीन चेयरमैन के साथ कई बार की वार्ता भी उनकी अगुवाई में हुई, लेकिन परिणाम सामने नहीं आया. इसके बाद गोमिया विस क्षेत्र से वर्ष 2019 में आजसू प्रत्याशी डॉ लंबोदर महतो की जीत के बाद यह आंदोलन आजसू की श्रमिक यूनियन एजेएसस के बैनर तले चला गया. जब यहां भी किसी तरह का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया तो पुन: यह आंदोलन झारखंड प्रदेश असंगठित मजदूर कांग्रेस (इंटक) के नेतृत्व में किया जाने लगा. वर्ष 2022-23 में एक बार एरिया को बंद किया गया. इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष ददई दुबे के नेतृत्व में सीसीएल मुख्यालय व एरिया स्तर पर प्रबंधन के साथ कई बार वार्ता हुई. इसमें प्रबंधन की ओर से कहा गया कि कथारा में बनने वाली नयी वाशरी में काम से बैठाये गये क्लीनिंग मजदूरों को नियोजित करने का प्रयास किया जायेगा. लेकिन प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्डों की पुनर्बहाली पर प्रबंधन ने साफ इंकार कर दिया.
कम वेज व डेढ़ माह के बकाया का मामला आरएलसी में गया
आंदोलन का नेतृत्व कर चुके झारखंड प्रदेश असंगठित मजदूर कांग्रेस (इंटक) के महामंत्री संतोष कुमार आस ने बताया कि 232 प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्डों को काम के दौरान कम वेज दिये जाने दिये जाने तथा डेढ़ माह के बकाया वेतन की मांग का मामला हमलोग आरएलसी में ले गये. यहां पांच साल सुनवाई चली. आरएलसी धनबाद के क्षेत्रीय आयुक्त एसके नायक ने 30 अगस्त 2022 को आदेश दिया कि 116 प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्डों को डीजीआर कंपनी एक माह के अंदर 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान करे. नहीं करने पर सीसीएल के जीएम 45 दिनों के अंदर इसका भुगतान सुनिश्चित करें. लेकिन डीजीआर कंपनी व सीसीएल की ओर से किसी तरह का पहल नहीं किये जाने पर दो फरवरी 2023 को आरएलसी ने डीसी कार्यालय में सर्टिफिकेट केस दायर किया. इसके बाद सीसीएल ने 1.60 करोड़ रुपया आरएलसी कोर्ट में जमा किया. साथ ही आरएलसी के निर्णय के विरुद्ध जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में याचिका दायर किया है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
