किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में सिकल सेल एनीमिया व थैलेसीमिया की समय पर पहचान और उपचार के लिए मंगलवार को चास सीएचसी में ‘प्रोजेक्ट स्वास्थ्य’ के तहत कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार, जपाइगो के डॉ अनिल प्रभंजन और बीडीएम चंद्रशेखर ने संयुक्त रूप से किया.
नियमित जांच पर बल
डॉ अनिल कुमार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया गंभीर आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियां हैं. समय पर स्क्रीनिंग, चिकित्सकीय परामर्श और उचित उपचार से मरीजों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है.
उन्होंने किशोरियों और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच को बीमारी की शुरुआती पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण बताया. बीमारी से पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी.
प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर चर्चा
कार्यशाला में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की शुरुआती स्क्रीनिंग, बीमारी से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और जागरूकता बढ़ाने पर चर्चा हुई. स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी के कारण, प्रमुख लक्षण, जांच की वैज्ञानिक प्रक्रिया और स्क्रीनिंग के महत्व की जानकारी दी गयी.
समय पर पहचान से चिकित्सकीय सेवाओं में आसानी
वक्ताओं ने कहा कि समय पर पहचान होने से मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने में आसानी होती है। कार्यशाला में अधिक से अधिक पात्र किशोरियों और गर्भवती महिलाओं को स्क्रीनिंग से जोड़ने तथा संभावित मरीजों की समय पर पहचान के लिए रणनीति पर भी चर्चा की गयी. मौके पर राजकिशोर कुमार, अश्वनी कुमार, चांदनी कुमारी समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे.
