बोकारो: महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, मजदूरों के अधिकार और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के खिलाफ सोमवार को बोकारो में किसान-मजदूरों ने शक्ति प्रदर्शन किया. केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत सैकड़ों किसान-मजदूर सड़क पर उतरे. मजदूरों की रैली हवाई अड्डे से, जबकि किसानों की रैली चेकपोस्ट से निकली और दोनों रैलियां गरगा पुल पर पहुंचकर एकत्र हुईं.
गरगा पुल पर आधे घंटे बाधित रहा आवागमन
गरगा पुल पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटने के बाद करीब आधे घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा. आंदोलनकारियों ने सड़क पर बैठकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया. करीब आधे घंटे बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर अमृत पार्क स्थित कैंप जेल पहुंचाया. किसान-मजदूर नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचायी जा रही हैं.
चार श्रम संहिताएं वापस लेने की मांग
सभा में वक्ताओं ने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी के कारण आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि मजदूरों के अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं. सार्वजनिक क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण को भी नेताओं ने जनविरोधी बताया.
आंदोलनकारियों ने चारों श्रम संहिताओं के मजदूर विरोधी प्रावधानों को रद्द करने, सभी कृषि उपज की वैधानिक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी और किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी की मांग की.
रोजगार गारंटी और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी, ग्रामीण एवं शहरी रोजगार गारंटी, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा और पेंशन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आवास की व्यवस्था की मांग उठायी. स्कीम वर्करों के साथ-साथ अनुबंधित और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग भी की गयी.
आंदोलन में एटक के महामंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह, सीटू के महामंत्री आरके गोराई, एक्टू के देव दीप सिंह दिवाकर, जेकेएमयू के डीसी गोहाई, एआईयूटीयूसी के मोहन चौधरी, एचएमएस के आरके वर्मा समेत संयुक्त किसान मोर्चा के कुमुद महतो, विश्वनाथ बनर्जी, शकुर अंसारी सहित बड़ी संख्या में किसान-मजदूर शामिल हुए.
