चंदनकियारी एवं चास क्षेत्र में वर्ष 1982-84 में हुए सर्वे एवं बंदोबस्ती में कथित त्रुटियों का मामला एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है. स्थानीय लोगों का दावा है कि सर्वे रिकॉर्ड में दर्ज खामियों के कारण क्षेत्र के 10 लाख से अधिक लोग और किसान वर्षों से भूमि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं. समस्या के स्थायी समाधान के लिए पिछले करीब 15 वर्षों से री-सर्वे कराने और बंदोबस्ती अभिलेखों की त्रुटियों को दूर करने की मांग की जा रही है.
राज्यपाल को भी सौंपा गया ज्ञापन
इसी मांग को लेकर मंगलवार को डॉ जयदेव कुमार महतो के नेतृत्व में प्रह्लाद महतो, रघुनाथ महतो, मिथलेश सरन, मितन कुमार महतो एवं दीपक कुमार महतो के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन, रांची में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन के माध्यम से चंदनकियारी और चास क्षेत्र में वर्ष 1982-84 के सर्वे एवं बंदोबस्ती से संबंधित अभिलेखों की व्यापक जांच कराने, रिकॉर्ड में दर्ज त्रुटियों का निराकरण करने तथा प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र री-सर्वे कराने की मांग की गयी
मालगुजारी भी नहीं जमा कर पा रहे कई किसान
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भूमि संबंधी विसंगतियों के कारण बड़ी संख्या में किसान और परिवार लंबे समय से परेशान हैं. सरकार को मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए. स्थानीय लोगों के अनुसार, सर्वे रिकॉर्ड में गड़बड़ियों के कारण कई किसान अपनी जमीन की मालगुजारी तक जमा नहीं कर पा रहे हैं. इसके चलते उन्हें सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ लेने में भी परेशानी हो रही है.
कई स्तर की समस्याएं आ रहीं सामने
भूमि दस्तावेजों में दर्ज विसंगतियों का असर केवल जमीन के मामलों तक सीमित नहीं है. लोगों का कहना है कि बच्चों के जाति एवं आय प्रमाण पत्र बनवाने में भी कठिनाई होती है. इससे उनकी शिक्षा और भविष्य से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं. ग्रामीणों ने सरकार से पुराने सर्वे अभिलेखों की समीक्षा कर त्रुटियों को दूर करने और री-सर्वे की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है.
