सीसीएल के कथारा प्रक्षेत्र अंतर्गत स्वांग-गोविंदपुर कोलियरी में लंबे समय से खुले में रखी भारी मात्रा में लोहे की सामग्री के गायब होने का मामला सामने आया है. डंपरों के डाला, इंजन, मशीनरी के पुर्जों और अन्य लोहे के सामान के बड़े पैमाने पर गायब होने से इनकी चोरी की आशंका जतायी जा रही है. गायब सामग्री की कीमत करोड़ों रुपये होने की चर्चा है. मामला सामने आने के बाद कोलियरी की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामग्री के भंडारण और स्टॉक प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं.
पुराने एक्सकैवेशन कार्यालय के पास खुले में पड़ा था स्क्रैप
बताया जाता है कि पुराने एक्सकैवेशन कार्यालय के पास लंबे समय से बड़ी मात्रा में अनुपयोगी और पुरानी लोहे की सामग्री खुले में पड़ी थी. विभागीय प्रक्रिया के तहत कुछ सामानों की नीलामी कर उन्हें हटा दिया गया. बावजूद इसके काफी सामग्री मौके पर बची हुई थी. समय बीतने के साथ यह सामग्री धीरे-धीरे कम होती गयी और अब बड़ी मात्रा में सामान वहां से गायब हो गये हैं.
टुकड़ों-टुकड़ों में ले जायी गयी लौह सामग्री
आशंका है कि भारी उपकरणों और लोहे के सामान को काटकर छोटे हिस्सों में तब्दील किया गया और फिर वाहनों से बाहर ले जाया गया. स्थानीय स्तर पर पूर्व में सामग्री चोरी को लेकर पुलिस में शिकायत और प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी भी सामने आयी है. बाद में सुरक्षा के लिहाज से कुछ सामग्री को जीरो प्वाइंट के समीप स्थानांतरित किया गया.
स्टॉक सत्यापन से होगा खुलासा
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल गायब सामग्री के हिसाब-किताब को लेकर है. नीलामी में कितनी सामग्री गयी, विभागीय कार्यों में कितना सामान इस्तेमाल हुआ और कितना स्टॉक गायब है, इसका स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है.
ऐसे में पूरे स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर उसे उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाने की जरूरत है. मामले ने सीसीएल की संपत्ति की सुरक्षा, स्टॉक प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी स्तर पर पूरे मामले की जांच कराकर गायब सामग्री और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाती है या नहीं.
