तनाव में सही निर्णय लेना मुश्किल, परिवार का साथ और काउंसलिंग जरूरी

मानसिक स्वास्थ्य पर तनाव, अकेलापन और आर्थिक परेशानियां भारी पड़ सकती हैं. ऐसे में परिवार और दोस्तों का सहयोग और विशेषज्ञ की सलाह लेना बहुत महत्वपूर्ण है. अपनी भावनाओं को साझा करना कमजोरी नहीं, बल्कि मजबूती का संकेत है.

बोकारो. जिंदगी में तनाव, अकेलापन, अवसाद, आर्थिक परेशानी और रिश्तों से जुड़ी समस्याएं मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं. कई बार व्यक्ति अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पाता और धीरे-धीरे खुद को अकेला महसूस करने लगता है. ऐसी स्थिति में परिवार और दोस्तों का सहयोग तथा समय पर काउंसलिंग काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव की स्थिति में व्यक्ति के लिए सही और गलत के बीच निर्णय लेना भी कठिन हो सकता है. इसलिए मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेतों को समझना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना जरूरी है.

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि मानसिक परेशानी को नजरअंदाज नहीं करें. अपनी बात परिवार, मित्र या चिकित्सक के साथ साझा करना कमजोरी नहीं, बल्कि मदद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. आत्महत्या की रोकथाम के लिए परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों और समाज को मिलकर संवेदनशील वातावरण तैयार करने की जरूरत है.

तनाव मन और व्यवहार दोनों को प्रभावित करता है

सदर अस्पताल बोकारो के मनोचिकित्सक डॉ. प्रशांत कुमार मिश्र ने कहा कि तनाव मन से जुड़ी स्थिति है. जब व्यक्ति परिस्थितियों के साथ संतुलन और सामंजस्य नहीं बैठा पाता, तो मानसिक द्वंद बढ़ सकता है. इससे मन अशांत रहता है और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि तनाव को समझना और उसके कारणों की पहचान करना जरूरी है. इसके बाद जीवनशैली और व्यवहार में धीरे-धीरे बदलाव कर तनाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर परिवार का सहयोग और विशेषज्ञ की काउंसलिंग लेनी चाहिए.

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बढ़ती आकांक्षाएं भी युवाओं में तनाव का कारण

डॉ. मिश्र के अनुसार आज के समय में तनाव विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रहा है. युवाओं में बढ़ती आकांक्षाएं, प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाओं का दबाव भी तनाव का कारण बन सकता है. ऐसे में युवाओं से नियमित संवाद जरूरी है.

परिवार के सदस्यों को बच्चों और युवाओं के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए. लगातार चुप रहना, लोगों से दूरी बनाना, पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि कम होना या लगातार परेशान नजर आना जैसे बदलावों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जरूरत महसूस होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है.

बोकारो में आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय

उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार बोकारो जिले में आत्महत्या की औसतन चार से पांच घटनाएं प्रतिमाह होने का दावा किया गया है. हालांकि, इस आंकड़े के आधिकारिक स्रोत का उल्लेख उपलब्ध सामग्री में नहीं है. इसलिए इसे आधिकारिक आंकड़ा मानने के बजाय स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चिंता के रूप में देखा जाना चाहिए.

पिछले दिनों जिले में आत्महत्या से जुड़ी कुछ घटनाएं भी सामने आयी हैं. जुलाई 2026 के अंत में बोकारो सदर अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग से जुड़े एक चिकित्सक की मृत्यु का मामला सामने आया था. पुलिस ने मामले की जांच की थी. इसी तरह हरला थाना क्षेत्र में एक परिवार के तीन सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला भी सामने आया था. पुलिस की प्रारंभिक जांच में आर्थिक परेशानी की बात सामने आने की जानकारी दी गयी थी. इन घटनाओं के वास्तविक कारणों का निर्धारण संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है.

समस्या छिपाने के बजाय मदद लें

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक परेशानी को अकेले झेलने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना पहला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. परिवार को भी बिना आलोचना या दबाव के व्यक्ति की बात सुननी चाहिए. गंभीर मानसिक संकट की स्थिति में चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए.

मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए Tele-MANAS के 14416 नंबर पर भी संपर्क किया जा सकता है. समय पर बातचीत, काउंसलिंग और उपचार से मानसिक संकट से जूझ रहे व्यक्ति को सहायता मिल सकती है. आत्महत्या रोकथाम का मूल संदेश यही है कि परेशानी कितनी भी कठिन क्यों न लगे, व्यक्ति को अकेला न छोड़ा जाए और उसे समय पर मदद तक पहुंचाया जाए.

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By Sunil tiwari

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