क्या आपनें किसी को खबरों के प्रति जागरूक बनाते देखा है. अगर नहीं तो आज हम आपको बोकारो के ऐसे शख्स से रू बा रू कराने वाले हैं जो खुद तो नहीं पढ़ें लेकिन पेपर बांटकर लोगों को अखबार पढ़ने के लिए जागरूक बना रहे हैं. वो भी बगैर मेहनताना शुल्क लिये. आपको बता दें कि 65 वर्षीय बिरंची मुंडा 20 वर्षों से घर-घर जाकर अखबार बांट रहे हैं. वो सीसीएल से सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
स्वांग कोलियरी से 2017 में हुए सेवानिवृत्त :
श्री मुंडा बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड अंतर्गत सीसीएल कथारा प्रक्षेत्र के स्वांग कोलियरी में चालक के पद से 2017 में सेवानिवृत हो गये. सेवानिवृत्ति के 15 वर्ष पूर्व से ही वह अखबार विक्रेता अनिरुद्ध पासवान से अखबार लेकर बगैर किसी मेहनताना लिये नि:शुल्क पिपराडीह व स्वांग कोलियरी न्यू माइनस आवासीय क्वार्टरों में वितरण करते रहे हैं.
उन्होंने शुरुआत एक-दो अखबार बांटने से की थी. जैसे-जैसे पाठकों की मांग बढ़ती गयी, वैसे-वैसे अखबार भी बढ़ता गया. फिलहाल वह अखबार की 50 प्रति रोजाना पाठकों को पढ़ रहे हैं. गर्मी हो या बरसात या ठंड का मौसम, श्री मुंडा प्रात: पांच से छह बजे के बीच टहलते हुए गोमिया स्टेशन पहुंच जाते हैं. सेवानिवृत्ति से पहले भी वह सुबह अखबार वितरण करने के बाद ही ड्यूटी चले जाते थे. वह सुबह में स्टेशन पर कहीं बिजली का बल्ब जलते देखते हैं तो तुरंत स्वीच ऑफ कर देते हैं.
आ गये अखबार वाले अंकल :
श्री मुंडा का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने के पहले व कर्मचारियों को ड्यूटी जाने के पूर्व अखबार घर-घर में पहुंचा देता हूं, ताकि बच्चे व कर्मचारी देश-दुनिया की खबरों से रूबरू होकर अपने-अपने कार्यों मे चले जायें. बिरंची को अपने आवास क्षेत्र में अखबार वितरण करते देख बच्चे कहते हैं कि अखबार वाले अंकल आ गये हैं.
दूसरों को पढ़ते देख होती है खुशी :
श्री मुंडा का कहना है कि वह स्वयं तो नहीं पढ़ सकें, लेकिन दूसरों को पढ़ते देख उन्हें काफी खुशी होती है. श्री मुंडा मूल रूप से चाईबासा के रहने वाले हैं तथा रांची में आवास बनाये हैं, परंतु अखबार वितरण करने के जुनून के चलते वह रांची नहीं जाकर स्वांग कोलियरी में अपने आवास में रह रहे हैं. वह ग्राहकों से प्रति माह अखबार का पैसा वसूल कर हॉकर को पहुंचा देते हैं. उनकी तीन लड़कियों में एक की शादी हो चुकी है.
सिने स्टॉर देवानंद के हैं फैन :
श्री मुंडा फिल्म मशहूर सिने स्टार देवानंद के काफी फैन रहे हैं. वह बराबर टोपी पहने रहते हैं. उनका कहना है कि जब तक वह स्वस्थ रहेंगे, तब तक वे लोगों के बीच अखबार वितरण का कार्य करते रहेंगे.
रिपोर्ट-नागेश्वर कुमार
