Bokaro News: फुसरो शहर में स्थायी बस स्टैंड नहीं, नीलामी से लाखों कमाता है नगर परिषद

Bokaro News: बोकारो जिले के फुसरो शहर में स्थायी बस स्टैंड नहीं है. फिर भी नगर परिषद की ओर से हर साल इसकी नीलामी की जाती है. निर्मल महतो चौक के पास सड़क के किनारे में विभिन्न जगहों के लिए लंबी दूरी की बसें लगती हैं. धनबाद की ओर जाने वाले यात्रियों को फुसरो सब्जी मंडी के पास ही मुख्य सड़क के किनारे बस का इंतजार करना पड़ता है. सड़क के किनारे बसें व अन्य छोटे वाहन लगते हैं. इसके कारण यहां अक्सर सड़क जाम हो जाती है.

‍Bokaro News| फुसरो (बोकारो), आकाश कर्मकार : बोकारो जिले के फुसरो शहर में स्थायी बस स्टैंड नहीं है. फिर भी नगर परिषद की ओर से हर साल इसकी नीलामी की जाती है. बस स्टैंड के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपए के राजस्व की वसूली करने के बाद भी यात्रियों को कोई सुविधा नहीं मिलती है. सड़क को ही स्टैंड का नाम देकर प्रतिवर्ष नगर परिषद राजस्व की वसूली कर रहा है. मुख्य सड़क के किनारे 20 से 25 बसें रुकतीं हैं. यहां से झारखंड के कई जिलों के अलावा बिहार के बक्सर, दाऊदनगर, बलिया, औरंगाबाद, डेहरी, छपरा, सीवान आदि जगहों के लिए बसें जाती हैं.

निर्मल महतो चौक के पास से खुलती हैं लंबी दूरी की बसें

निर्मल महतो चौक के पास सड़क के किनारे में विभिन्न जगहों के लिए लंबी दूरी की बसें लगती हैं. धनबाद की ओर जाने वाले यात्रियों को फुसरो सब्जी मंडी के पास ही मुख्य सड़क के किनारे बस का इंतजार करना पड़ता है. सड़क के किनारे बसें व अन्य छोटे वाहन लगते हैं. इसके कारण यहां अक्सर सड़क जाम हो जाती है. गोमिया-हजारीबाग की ओर जाने के लिए यूको बैंक फुसरो के नजदीक तथा टाटा की ओर जाने के लिए भुवनेश्वर सिंह पेट्रोल पंप की दूसरी ओर बसें लगती हैं.

जहां-तहां सड़क पर बस का इंतजार करते हैं यात्री

इस स्थिति में जहां-तहां यात्रियों को खड़े रहकर बसों का इंतजार करना पड़ता है. वर्ष 2023 में फुसरो निर्मल महतो चौक के पास बस में चढ़ने के लिए सड़क पार करने के दौरान हाइवा की चपेट में आने से विक्रमगंज थाना के धारुपुर पोखरा निवासी मंजीत सिंह (30) की मौत हो गयी थी. मालूम हो कि फुसरो बाजार स्थित बस स्टैंड को कोरोना काल से फुसरो नगर परिषद की ओर से सब्जी बाजार बना दिया गया.

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प्रतिवर्ष लाखों का मिलता है राजस्व

फुसरो नगर परिषद प्रशासन की ओर से वर्ष 2018-19 में 10.51 लाख रुपए, 2019-20 में 11.56 लाख रुपए, 2020-21 में 17.50 लाख रुपए, 2022-23 में 19.41 लाख रुपए, 2023-24 में 25.15 लाख रुपए, 20224-25 में 27 लाख रुपए, 2025-26 में 30.06 लाख रुपए में बस स्टैंड की नीलामी की गयी थी. वर्ष 2021-22 में कोरोना काल के दौरान 2 पार्ट में स्टैंड की नीलामी की गयी थी.

बस स्टैंड बनाने के लिए सीसीएल ने दी है जमीन

फुसरो नगर परिषद को बस स्टैंड बनाने के लिए ढोरी खास के समीप सीसीएल ने वर्ष 2017 में ही जमीन उपलब्ध कराते हुए एनओसी दिया है. 8 साल बाद भी बस स्टैंड नहीं बन पाया है. बस स्टैंड के निर्माण के लिए नगर परिषद ने विभाग को प्रपोजल भेजा है, लेकिन आवंटन के अभाव में बस स्टैंड बन नहीं बना पाया है.

टेंपो स्टैंड भी नहीं है शहर में

फुसरो ओवरब्रिज के पूर्वी और पश्चिमी छोर पर, फल मंडी के पास तथा सब्जी मंडी के पास अलग-अलग टेंपों स्टैंड हैं. इससे भी यात्रियों को परेशानी होती है. सड़क किनारे पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण सड़कों पर ही सभी टेंपो खड़े रहते हैं. इससे यात्रियों के जान-माल का खतरा बना रहता है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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