कसमार, बोकारो जिले के कृषि बहुल ग्रामीण इलाकों में पिछले लगातार छाये घने कुहासे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कृषक आशंकित हैं कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही रुख बना रहा, तो रबी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है.
किसानों का कहना है कि प्याज की गाछी की रोपाई में उन्होंने काफी पैसे लगाये हैं. एक सौ ग्राम प्याज बीज की कीमत साढ़े चार सौ से पांच सौ रुपये तक का पड़ता है. यदि पाला पड़ा, तो 60 से 70 प्रतिशत तक फसल के नष्ट होने की आशंका है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक झटका लगेगा. वहीं आलू की फसल लगभग तैयार अवस्था में है. आगामी 15-20 दिनों में आलू की खुदाई शुरू होनी है, लेकिन पाले की चपेट में आने से पौधे सड़-गल सकते हैं और कंद का विकास रुक सकता है. प्रखंड के चंडीपुर गांव के कृषक विनोद महतो, श्याम महतो, मुरारी महतो, संतोष महतो, अखिलेश्वर महतो, तिजु महतो, झंडू महतो, रमेश महतो, टिकन महतो, ओबीलाल महतो, शिवदयाल महतो, नागेश्वर महतो, प्रमोद महतो, जानकी महतो आदि ने बताया कि आलू और प्याज के अलावा पालक, धनिया, बींस, करैला, टमाटर, खीरा जैसी सब्जियों के साथ-साथ गेहूं की फसल पर भी पाले का खतरा मंडरा रहा है. किसानों का अनुमान है कि यदि मौसम जल्द नहीं सुधरा, तो अकेले चंडीपुर गांव में ही 10 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है. हिसीम के आनंद कुमार महतो, सिंहपुर पंसस विनोद कुमार महतो, मुखिया प्रतिनिधि घनश्याम महतो, हरनाद के देवेंद्र नाथ महतो, मुरहूल सुदी के सुरेंद्र नाथ महतो, चंद्रमोहन सिंह आदि का भी यही मानना है कि लगातार कुहासा से फसलों की भारी क्षति हो सकती है.क्या कहते हैं कृषि सलाहकार
इस संबंध में कृषि सलाहकार प्रसेनजीत कुमार ने बताया कि धुंध और कुहासा रबी फसलों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. पाले से बचाव के लिए सब्जी के खेतों के चारों ओर रात या तड़के सुबह करीब तीन बजे पुआल जलाकर धुआं किया जा सकता है, जिससे तापमान कुछ हद तक नियंत्रित रहता है और फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है. उन्होंने यह भी सलाह दी कि ओस अधिक गिरने की स्थिति में फसलों में फफूंद और सड़न की समस्या बढ़ जाती है, इसलिए सप्ताह के अंतराल पर उचित फफूंदनाशक का छिड़काव जरूरी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
