Bokaro News : ब्रिटिश काल से कसमार में निकाला जा रहा रामनवमी जुलूस

Bokaro News : कसमार में रामनवमी जुलूस ब्रिटिश काल से निकाला जा रहा है.

कसमार में रामनवमी जुलूस ब्रिटिश काल से निकाला जा रहा है. इसकी शुरुआत वर्ष 1940-41 के आसपास हुई थी. उस समय गौरीनाथ चौबे, नारायण भगत, ब्रह्म पांडे, अरुण चौबे, भगवती शरण चौबे, काशीश्वर प्रसाद चौबे, कीर्ति नाथ महतो, विनोद चौबे, श्याम चौबे, रमेश चौबे, रमेश भगत, गणेश भगत आदि ने इसकी पहल की थी. तब से यह परंपरा लगातार जारी है. वर्ष 1959 में रामनवमी जुलूस को प्रशासनिक मान्यता मिली, जब गौरीनाथ चौबे के नाम से इसका लाइसेंस निर्गत किया गया. इसके बाद जुलूस और अधिक संगठित रूप में निकलने लगा. समय के साथ जुलूस का स्वरूप भव्य होता गया. वर्ष 1999 में सूरज जायसवाल की पहल पर पहली बार राम दरबार की आकर्षक झांकी जुलूस के साथ निकाली गयी.

सांप्रदायिक सौहार्द की भी है मिसाल

कसमार का रामनवमी जुलूस सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल है. आयोजन में मुस्लिम समुदाय की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती रही है. बाजारटांड़ स्थित बजरंगबली मंदिर की स्थापना भी इसका एक उदाहरण बना हुआ है. इसकी स्थापना में जौहर अली, राशु मियां और मुबारक अंसारी ने भी योगदान देकर सामाजिक एकता की मिसाल

पेश की थी.

सेवा की परंपरा बनी पहचान

रामनवमी जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं को शरबत और पानी पिलाने की पहल करीब पांच पीढ़ी पहले शिवराम भगत ने शुरू की थी. यह

सेवा भावना आज भी उनके परिवार द्वारा निभायी जा रही है.

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By Janak singh choudhary

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