Bokaro News : चार ब्लड बैंकों पर निर्भर हैं 200 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे

Bokaro News : बोकारो जिला में 200 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं.

बोकारो जिला में 200 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं. इनके लिए रक्त की जरूरत पड़ने पर चास-बोकारो के चार ब्लड बैंकों पर निर्भरता है. इसमें सदर अस्पताल, रेडक्राॅस, बोकारो जेनरल अस्पताल और केएम मेमोरियल के ब्लड बैंक शामिल हैं. रक्तदान कम होने पर थैलेसीमिया पीडित बच्चों के अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. एक परेशानी यह भी है कि जिले के बाहर से आने वाले थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए ब्लड की व्यवस्था इन्हीं ब्लड बैंकों को करनी पड़ती है.

कैंप दो स्थित सदर अस्पताल में 50 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे सूचीबद्ध हैं. इन्हें हर माह 30 से 35 यूनिट ब्लड देना पड़ता है. रेडक्राॅस ब्लड बैंक कैंप दो में 125 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे सूचीबद्ध हैं. हर माह 155 से 170 यूनिट ब्लड की व्यवस्था करनी पड़ती है. चास के केएम मेमोरियल अस्पताल में 15 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे सूचीबद्ध हैं और हर माह 20 यूनिट ब्लड देना पड़ता है. कभी-कभी एक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को एक माह में दो से तीन बार ब्लड देने की नौबत आ जाती है. इसके अलावे जिला में प्लास्टिक एनिमिया की परेशानियों से भी लगभग 50 लोग जूझ रहे हैं. इन्हें भी हर माह ब्लड की जरूरत पड़ती है.

ब्लड बैंक रक्तदाताओं की संख्या रक्त की खपत जरूरत

बोकारो जेनरल अस्पताल 17 से 18 प्रतिदिन 35 यूनिट प्रतिदिन 40 यूनिट प्रतिदिन रेडक्रास सोसाइटी ब्लड बैंक 05 से 08 प्रतिदिन 08 यूनिट प्रतिदिन 10 से 12 यूनिट प्रतिदिन

केएम मेमोरियल ब्लड बैंक 08 से 10 प्रतिदिन 10 यूनिट प्रतिदिन 15 यूनिट प्रतिदिन

सदर अस्पताल ब्लड बैंक 08 से 10 प्रतिदिन 12 यूनिट प्रतिदिन 20 यूनिट प्रतिदिन

थैलेसीमिया जागरूकता समिति ने बोकारो डीसी को भेजा त्राहिमाम पत्र

थैलेसीमिया जागरूकता समिति बोकारो ने डीसी को एक त्राहिमाम पत्र भेजा है. इसके माध्यम से बोकारो को थैलेसीमिया मुक्त करने की मांग की गयी है. कहा है कि मेजर थैलेसीमिया रक्त विकार की गंभीर बीमारी है. इससे पीड़ित को जीवन भर रक्त की जरूरत पड़ती है. इलाज दुर्लभ, जटिल व जोखिम भरा है. स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हर प्रसूता की थैलेसीमिया जांच एचपीएलसी (एचबीए2) आवश्यक रूप से लिखें, ताकि थैलेसीमिया पीड़ित शिशुओं की संख्या में गिरावट आ सके. जरूरत पड़ने पर प्रसूता की सीवीएस जांच करायी जाये. सभी राजकीय व निजी चिकित्सालय में एचपीएलसी जांच निशुल्क करने का प्रावधान हो. ब्लड चढ़ते-चढ़ते आयरन जमा हो जाता है. इसे घटाने के लिए देसी रॉक्स दवाई की जरूरत पड़ती है. थैलेसीमिया बच्चों को यह दवा उपलब्ध कराने की कोशिश की जाये. थैलेसीमिया माइनर युवक-युवतियों में कोई लक्षण परिलक्षित नहीं होते हैं. बिना एचपीएलसी जांच के अगर ऐसे युवक-युवती की शादी हो जाती है, तो मेजर थैलेसीमिया से पीड़ित शिशु के जन्म की संभावना 25 प्रतिशत तक होती है. इसलिए विवाह पूर्व या विवाह पंजीकरण के समय थैलेसीमिया जांच रिपोर्ट साथ लगाना अनिवार्य किया जाये.

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By Janak singh choudhary

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