Bokaro News : कोल इंडिया : 2014-15 में आया था स्पेशल फीमेल वीआरएस स्कीम, 2020 के पहले हो गया बंद
Bokaro News : राकेश वर्मा, बेरमो.
कोल इंडिया की विभिन्न अनुषांगिक इकाईयों में मेडिकल अनफिट के अलावा स्पेशल फीमेल वीआरएस स्कीम का लाभ भी कर्मियों के आश्रितों को मिला, लेकिन जहां 2016 से मेडिकल अनफिट के नाम पर पूरी तरह से आश्रितों की बहाली बंद कर दी गयी, वहीं पांच साल पहले स्पेशल फीमेल वीआरएस स्कीम को भी बंद कर दिया गया. मालूम हो कोल इंडिया में कार्यरत पांचों सेंट्रल ट्रेड यूनियन इंटक, एटक, एचएमएस, बीएमएस व सीटू के शीर्ष नेताओं द्वारा लगातार बनाये जा रहे दबाव के बाद कोल इंडिया ने 2014-15 में स्पेशल फीमेल वीआरएस स्कीम लाया था. इसके पीछे तर्क यह था कि चूंकि महिला कर्मियों को कानूनन शाम सात बजे के बाद माइंस में नहीं रखना है. इसलिए उनके स्थान पर उनके आश्रित पुत्र को नियोजन दिया जाये, ताकि कोल इंडिया को प्रोडक्टिव वर्कर मिल सकें. 2014-15 में जब इस स्कीम को शुरू किया गया तो 2014 से लेकर 2018 तक कोल इंडिया में करीब 16 हजार महिलाओं को इसका लाभ मिला. जबकि तकरीबन 1600 महिला कर्मी इस लाभ से वंचित रह गयीं. 2020 के पहले कोल इंडिया प्रबंधन ने इसे बंद करने की घोषणा करते हुए इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया. आदेश जारी होने के बाद कोल इंडिया की विभिन्न अनुषांगिक इकाईयों में यूनियन नेताओं व इस स्कीम के लाभ के दायरे में आने वाले आश्रित पुत्रों ने काफी आंदोलन किया. कंपनी मुख्यालय से लेकर कोल इंडिया मुख्यालय कोलकाता तक धरना-प्रदर्शन का दौर चला. पांचों सेंट्रल ट्रेड यूनियन के शीर्ष नेताओं से मिलकर आश्रित पुत्र पुन: इस स्कीम को चालू कराने का आग्रह करते रहे,लेकिन यह स्कीम चालू नहीं हुई. अब तो यह लड़ाई पूरी तरह से थम सी गयी है. जानकारी के अनुसार इस मामले को लेकर कुछ कर्मी अदालत भी गये थे. इस स्कीम को अदालत ने भी अवैध बताया था. ट्रेड यूनियन से जुड़े एक नेता के अनुसार अदालत ने इस स्कीम को संविधान के खिलाफ कहा था.मजदूर हित की मांगों को लेकर एकजुट आंदोलन की जरूरत :
सीटू नेता व जेबीसीसीआइ सदस्य डीडी रामानंदन कहते हैं कि फिलहाल पांचों सेंट्रल ट्रेड यूनियनों को मिलकर कोल इंडिया में बंद मेडिकल अनफिट, बंद फिमेल वीआरएस स्कीम के अलावा एमडीओ तथा रेवन्यू शेयरिंग के खिलाफ एकजुट होकर तीखा आंदोलन करने की जरूरत है. वहीं एटक नेता व जेबीसीसीआइ सदस्य लखनलाल महतो कहते हैं कि कोल इंडिया में बंद मेडिकल अनफिट, बकाया ग्रेच्यूटी राशि का भुगतान, सीपीआरएमएस तथा फीमेल वीआरएस स्कीम में छूटे हुए आश्रितों के नियोजन को लेकर पूरे कोल इंडिया में लगातार तीन दिनों तक पांचों सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के अलावा अन्य यूनियनों के साथ मिलकर चक्का जाम आंदोलन किये जाने की जरूरत है.तीन बार संशोधन किया गया था स्पेशल फीमेल वीआरएस स्कीम में :
कोल इंडिया में 2014-15 में जिन महिला कर्मियों की नौकरी 10 साल बची हुई थी, उनके लिए स्पेशल फीमेल वीआरएस स्कीम लायी गयी थी. इसमें पुरुष आश्रित को नौकरी देने का प्रावधान किया गया था. साथ ही इस स्कीम का लाभ लेने वाले आश्रित का कम से कम मैट्रिक पास होने जरूरी था, लेकिन इसमें आवेदन कम आने के कारण स्कीम में बदलाव किया गया. 10 साल बची नौकरी को घटा कर पांच साल कर दिया गया. वहीं आश्रित के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता शिक्षित रखी गयी. इसमें तय किया गया कि केवल नन टेक्निकल महिलाओं को इस स्कीम का लाभ दिया जायेगा. बाद में तकनीकी और नन तकनीकी नौकरी क्या है, इसको लेकर विवाद हो गया था. इसी मामले को लेकर कई कर्मियों के परिजन अदालत चले गये थे. आवेदकों में 42 को कलर ब्लाइंडनेस की समस्या पायी गयी थी. इसको नौकरी देने के लिए भी मजदूर यूनियन और कोल इंडिया प्रबंधन के बीच सहमति बनी थी. बाद में इन लोगों को भी इस स्कीम का लाभ नहीं मिल पाया. इसके बाद पुन: स्कीम में तीसरी बार बदलाव कर छह माह के लिए दो साल नौकरी बची रहने वाली महिलाओं को लाभ देने का निर्णय लिया गया. इसके लिए आश्रित की योग्यता मैट्रिक पास रखी गयी थी. आश्रित के लिए तीन साल प्रशिक्षण का प्रावधान किया गया था. तीन साल तक स्टाइपेंड देने के बाद स्थायी नौकरी देने की बात कही गयी थी. स्टाइपेंड देने के अलावा हॉस्टल में रह रह लोगों को भी सारा खर्च दिये जाने की बात कही गयी थी और कोल इंडिया ने दिया भी. प्रशिक्षण पाने वाले माइनिंग सरदार, इलेक्ट्रिशियन, फिटर आदि पद का ट्रेनिंग ले रहे सैकड़ों आश्रित कोल इंडिया में नियोजित भी हो गये. 10 साल वाली पहली स्कीम जब आयी थी तो इसमें कोल इंडिया ने यह भी नियम लगा दिया था कि इस स्कीम के तहत नौकरी लेने वाले आश्रितों को कोल इंडिया की इकाई सीएमपीडीआइ में समायोजित किया जायेगा तथा इसका पालन भी किया गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
