घोषणा के बाद भी नहीं बना 100 बेड का अस्पताल

30 से अधिक मरीजों को हर दिन रेफर करते हैं चिकित्सक बोकारो : बोकारो में इएसआइ का अपना अस्पताल नहीं है. इस कारण इएसआइ से संबद्ध 70 हजार कामगार व उनके परिजन स्वास्थ्य लाभ से प्रभावित हो रहे हैं. अस्पताल खोलने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है. समय-समय पर श्रमिक नेता […]

30 से अधिक मरीजों को हर दिन रेफर करते हैं चिकित्सक

बोकारो : बोकारो में इएसआइ का अपना अस्पताल नहीं है. इस कारण इएसआइ से संबद्ध 70 हजार कामगार व उनके परिजन स्वास्थ्य लाभ से प्रभावित हो रहे हैं. अस्पताल खोलने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है. समय-समय पर श्रमिक नेता दिल्ली दरबार तक में आवाज उठाते रहे हैं. पर आश्वासन के सिवा बोकारो को कुछ नहीं मिला. हालांकि दो अप्रैल 2018 को देवघर के समीप इएसआइसी अस्पताल की नींव रखने के लिए आमंत्रित तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उपस्थिति में पूर्व केंद्रीय श्रम मंत्री बंगारू दत्तात्रेय ने घोषणा की थी.
कहा था कि बोकारो में 100 बेड के इएसआइसी अस्पताल की स्थापना की जायेगी. घोषणा के बावजूद इएसआइसी अस्पताल खोलने के लिए अबतक कोई पहल नहीं की गयी. सेक्टर चार सिटी सेंटर में एक चिकित्सालय है. यहां तीन चिकित्सक हैं. गंभीर मरीज को रेफर करने के अलावा चिकित्सक के पास कोई उपाय नहीं बचता है. रेफर करने के बाद चिकित्सक लगातार मरीज के संपर्क में रहते हैं. सेक्टर चार सिटी सेंटर में खुले बीमा चिकित्सालय में प्रतिदिन 150 मरीजों का इलाज होता है.
विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में प्रतिदिन 30 से 32 मरीजों को रेफर किया जाता है. प्रतिदिन 10 से 12 गंभीर मरीजों को इएसआइ से संबद्ध अस्पतालों (केएम मेमोरियल अस्पताल चास, मुस्कान अस्पताल चास व नीलम अस्पताल चास) में भर्ती करने के लिए भेजा जाता है. इसके बाद इएसआइसी के अस्पताल रांची या जमशेदपुर रेफर किया जाता है. इससे मरीज के परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. कई लोग परेशान होकर खुद के पैसे से इलाज कराने लगते हैं.

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