चास : चास के मुख्य मार्गों में शामिल मेनरोड पुराना बाजार में नालियों की सफाई से लोगों को जितनी राहत मिली है, उससे अधिक परेशानी भी अब बढ़ गयी है. नालियों से निकले गंदगी व मलबे का उठाव नहीं होने से यह पूरे सड़क पर फैल गयी है. इसकी दुर्गंध लोगों के लिये मुसीबत बन गयी है. बाजार आने वाले लोगों को आवाजाही में भी परेशानी हो रही है.
स्थानीय विकास मोदक, वैद्यनाथ पाल, शिवा बनर्जी ने बताया कि मेनरोड में नालियों की सफाई निगम कार्यालय काफी दौड़ने के बाद होती है. इसलिये यहां के नालियों की सफाई कई-कई महीनों बाद होती है. निगम को काफी गुजारिश करने पर सफाई कर्मियों ने नाली को साफ तो किया, लेकिन उसका कचरा सड़क पर ही छोड़ दिया. कचरा उठाव करने वाला वाहन आया ही नहीं.
सड़क किनारे जगह-जगह कचरे का ढेर लगा हुआ है. नालियों की सफाई नहीं होने से मच्छरों का भी प्रकोप बना हुआ है. इस मार्ग से हर रोज सैकड़ों लोग आवाजाही करते हैं. लोगों ने बताया कि आखिरकार विवश होकर लोग अपने घरों के सामने से खुद ही सफाई करते हैं.
मेनरोड पुराना बाजार में सफाई के नाम पर होती है खानापूर्ति : रवि वर्मा, विकास जायसवाल, शुभम ठाकुर व कालीपद ने बताया कि निगम की ओर से सिर्फ सफाई के मद में हर माह लाखों रुपये खर्च करती है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है इतने खर्च के बावजूद पुराना बाजार सहित मुहल्लों की सफाई की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं है.
स्वच्छता सर्वेक्षण के पूर्व सफाई की स्थिति में काफी सुधार हुआ था, सड़कों पर एवं गलियों में दिन तो दिन रात में भी झाडू लगता था. वार्ड के प्रत्येक डस्टबिन में डाले गए कचरे की नियमित सफाई होती थी. जगह-जगह स्वच्छता से संबंधित बैनर-पोस्टर लगाये गये थे. निगम कर्मी भी सफाई को लेकर पूरी तरह मुस्तैद था.
प्रतिदिन निगम की एक टीम सफाई का जायजा लेने हर वार्ड में आता था. टीम के आने तक पूरा वार्ड साफ-सुथरा एवं सड़क चकाचक लगता था, लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण टीम के जाते ही स्थिति फिर से नारकीय हो गयी है. बताया कि जनवरी से फिर से स्वच्छता सर्वेक्षण का ढोंग रचा जायेगा. सर्वे करने आयी टीम को सिर्फ उन्हीं जगह ले जाया जायेगा, जहां निगम अपनी सेटिंग करके रखा है.
