जोड़ापोखर: सिंफर डिगवाडीह में गुरुवार को केंद्रीय विद्यालय के बच्चों के बीच वैज्ञानिक संपर्क कक्षा से प्रयोगशाला तक जिज्ञासा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सिंफर डिगवाडीह के वैज्ञानिक प्रमुख डॉ आशीष मुखर्जी ने विज्ञान में अभिरुचि रखने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में कोल क्लीन तकनीक सबसे जरूरी है, ताकि कोयला […]
जोड़ापोखर: सिंफर डिगवाडीह में गुरुवार को केंद्रीय विद्यालय के बच्चों के बीच वैज्ञानिक संपर्क कक्षा से प्रयोगशाला तक जिज्ञासा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सिंफर डिगवाडीह के वैज्ञानिक प्रमुख डॉ आशीष मुखर्जी ने विज्ञान में अभिरुचि रखने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में कोल क्लीन तकनीक सबसे जरूरी है, ताकि कोयला में छाई की मात्रा कम की जा सके. श्री मुखर्जी ने कहा कि कोयला से गैस, केमिकल, तब पेट्रोल और डीजल बनाकर सिंफर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति ला रहा है.
वैज्ञानिक एनके श्रीवास्तव ने समस्या बताते हुए कहा कि कोयला का सबसे अधिक उपयोग पावर प्लांट में होता है. इससे निकलने वाली 170 मिलियन टन राख प्रत्येक वर्ष कहां रखा जाये, इससे बढ़ता प्रदूषण पर्यावरण के लिए खतरा है. कहा कि देश में कोयला से निकलने वाली राख छारीय प्रवृत्ति की है. इसका उपयोग हम कृषि के क्षेत्र में ला सकते हैं, परंतु लाया नहीं जा रहा है.
यह दुर्भाग्यपूर्ण है. कोल प्रोजेक्ट वैज्ञानिक टी गौरी चरण ने बच्चों को सिंफर का लैब दिखाया. इसमें गैसिफिकेशन लैब, कोल प्रोजेक्ट शामिल था. डॉ पी दत्ता (कोल गैसिफिकेशन) वैज्ञानिक ने कोयले से निकलने वाली सीओ-2 को किस प्रकार से उपयोगी बनाया जाता है, उसकी विधि के बारे में बच्चों को बताया. कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय धनबाद के 25, बोकारो- 1 से 6, बोकारो-2 से 8, दानापुर से 10, पटना से 9 छात्र- छात्राएं आये थे. बच्चे सिंफर का प्रोजेक्ट देख काफी उत्साहित थे.