बेरमो: सीसीएल के ढोरी प्रक्षेत्र के एसडीओसीएम (सलेक्टेड ढोरी ओपेन कास्ट माइंस) अंतर्गत सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) को अंतत: सर्वे ऑफ प्लांट घोषित कर दिया गया. इसके साथ ही इसके खुलने के आसार खत्म हो गये है. पिछले डेढ़ साल से इस प्लांट के बंद रहने से यहां कार्यरत 140 मजदूरों का भविष्य भी अंधकारमय हो गया है. मालूम हो कि जनवरी 2016 से सीएचपी प्लांट को मुख्यालय के आदेश के बाद ढोरी क्षेत्रीय प्रबंधन ने बंद कर दिया था. इसके कारण यहां वर्षों से कार्यरत करीब 140 मजदूरों का वेतन भी बंद हो गया. जबकि इसके पूर्व प्रबंधन हाई पावर कमेटी की अनुशंसा के तहत यहां के मजदूरों को वेतन भुगतान करती रही है. चिरुडीह श्रमिक सहयोग समिति के मातहत सीएचपी के मजदूरों का वेतन भुगतान सीसीएल प्रबंधन वर्षों से करता आ रहा है.
जनवरी 2016 में सीसीएल प्रबंधन का आदेश आया कि चुकि: सीएचपी माइनस 100 एमएम कोल क्रश करने में अक्षम साबित हो रहा है, इसलिए इस प्लांट को बंद किया जाये. साथ ही प्रबंधन ने ढोरी क्षेत्रीय प्रबंधन को पत्र के माध्यम से यह भी कड़ा निर्देश दिया कि एक टन भी कोयला बगैर क्रशिंग के नहीं जायेगा. इसके बाद पूरे एरिया में कई फीडर ब्रेकर लगाये गये. कुल 11 फीडर ब्रेकर में सात फीडर ब्रेकर माइनस 100 एमएम कोल क्रश कर रहा है. पूर्व में सीएचपी में माइनस 200 एमएम का कोल क्रश होने के बाद डीवीसी के बीटीपीएस को भेजा जाता था. लेकिन बीटीपीएस ने भी माइनस 100 एमएम का ही क्रश कोल लेने का दबाव बनाते हुए सीएचपी का कोयला लेना बंद कर दिया. सीएचपी को बंद कर दिये जाने के बाद कार्यरत मजदूरों के वेतन मद का पैसा भी सीसीएल मुख्यालय ने भेजना बंद कर दिया. मालूम हो कि सीएचपी को चालू करने व मजदूरों का बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर गत वर्ष इंटक महामंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह के निर्देश पर आंदोलन भी हुआ था. एरिया प्रबंधन के साथ श्री सिंह ने वार्ता भी की थी, लेकिन श्रमिक नेताओं के दबाव के बावजूद भी प्लांट चालू नहीं हो सका. इसके अलावा गिरिडीह सांसद रवींद्र कुमार पांडेय ने भी सीएचपी बंद होने का मामला कई बार लोकसभा में उठाया.
क्वालिटी व विजिलेंस विभाग की टीम आयी थी जांच करने
गत वर्ष सीएचपी को बंद कर दिये जाने के बाद मुख्यालय से क्वालिटी (सेल्स विभाग) की टीम दो बार तथा विजिलेंस विभाग की टीम प्वाइंट में जांच करने आयी थी. इसके अलावा सिविल इएंडएम की अलग-अलग टीम आयी. इसके अलावा कोल इंडिया मुख्यालय कोलकाता से भी एक जांच टीम आयी. साथ ही हेड क्वार्टर ने इसके जांच के लिए एक कमेटी भी गठित कर दी. कमेटी ने इस प्लांट को सर्वे ऑफ घोषित कर रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी. डीटीओ ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग में इस रिपोर्ट पर मुहर लगा दी. इसके बाद सीएचपी को सीसीएल मुख्यालय ने सर्वे ऑफ प्लांट घोषित कर दिया.
क्या कहना है अधिकारियों का
सीसीएल मुख्यालय के महाप्रबंधक (इएंडएम) गोपाल बिहारी लाल ने कहा कि गत वर्ष सीएचपी की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीटीओ को सौंपी थी. सीएचपी को सर्वे ऑफ प्लांट घोषित करने का निर्णय सीसीएल मुख्यालय का है. वहीं, ढोरी एरिया के एसओ (इएंडएम) बीके सिन्हा का कहना है कि सीएचपी को सर्वे ऑफ प्लांट घोषित किया जा चुका है.
वर्ष 2011 में भी हुई थी विजिलेंस इंक्वायरी
ढोरी सीएचपी वर्ष 1992 से अस्तित्व में आया था. सीएमपीडीआइ अधिकारियों की माने तो इस प्लांट की आयु सीमा 15 साल की थी, जो कब की पूरी हो गयी. वर्ष 2011 में सीएचपी का एनडीटी (नन डिस्ट्रेक्टीव टेस्ट) होने के बाद प्लांट को सर्वे ऑफ घोषित किया गया था. उस वक्त सीसीएल की विजिलेंस टीम ने इंक्वायरी की थी. ढोरी के तत्कालीन जीएम, पीओ एवं एसओ (इएंडएम) से विजिलेंस के अधिकारियों ने पूछताछ की थी. कहा था कि जब प्लांट को सर्वे ऑफ घोषित किया गया है तो फिर इसे कैसे चलाया जा रहा है. विजिलेंस टीम को उस वक्त क्षेत्रीय प्रबंधन प्लांट चलाने का कोई डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं करा सका था.
