धनबाद : बरवाअड्डा के चर्चित तिहरे हत्याकांड में शुक्रवार को जिला व सत्र न्यायाधीश संजीता श्रीवास्तव की अदालत ने फैसला सुनाया. महिला अनुपमा देवी, उसके दो वर्षीय पुत्र अभय कुमार व तीन वर्षीया पुत्री आभा कुमारी की हत्या गला दबाकर व धारदार चाकू से रेत कर कर दी गयी थी.
अदालत ने सजा के बिंदु पर फैसला सुनाते हुए जेल में बंद बड़ाजमुआ, बरवाअड्डा निवासी मृतका के पति भैरवनाथ दसौंधी को भादवि की धारा 302/120 (बी)में दोषी पाकर फांसी की सजा सुनायी, जबकि मृतका की सास गायत्री देवी, ससुर राजेंद्र प्रसाद दसौंधी व पति की प्रेमिका चचेरी भाभी रूपा देवी को उम्रकैद व तीस-तीस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी.
जुर्माना राशि अदा नहीं करने पर सजायफ्ताओं को एक-एक साल की सजा अतिरिक्त काटनी होगी.फैसला सुनाये जाने के वक्त अदालत में मृतका अनुपमा देवी के माता-पिता मौजूद थे. अदालत ने 10 मई को आरोपियों को दोषी करार दिया था.
क्या था मामला: भैरवनाथ दसौंधी (35) अपने परिवार के साथ में बड़ा जमुआ में विष्णु पांडेय के मकान में भाड़े पर रहता था. उसका चचेरे भाई पप्पू दसौंधी के निधन के बाद उसकी विधवा रूपा देवी से भैरव का प्रेम हो गया था. रूपा भाटडीह (महुदा) में अपने मायके में रह रही थी. वहां दोनों का आना-जाना जारी था. दोनों के बीच अनैतिक संबंध की जानकारी उसकी पत्नी अनुपमा व पूरे परिवार को हो गयी थी. इसको लेकर पति-पत्नी में विवाद शुरू हो गया था. दूसरी ओर, रूपा भी चाहती थी कि भैरव सिर्फ उसी का बना रहे. इसी को लेकर भैरवनाथ ने अपनी पत्नी व बच्चों को रास्ते से हटाने की योजना बनायी.
फिर अपने बेटे के जन्म दिनकी रात उसने जोरदार पार्टी दी. सभी अतिथियों के लौट जाने के बाद रात को अनुपमा देवी की हत्या जूता के फीता से गला घोंट कर कर दी. उसके बाद भैरवनाथ ने धारदार चाकू से सोये हुए अपने बच्चों की हत्या एक-एक कर गला रेत कर कर दी. घटना के बाद वह चाकू और जूता के फीता को लेकर पैदल धनबाद स्टेशन आया और बस से रांची चला गया. वहां से हटिया स्टेशन गया और वहां से आनंद विहार ट्रेन से गया होते हुए दिल्ली भाग गया.
घटना के बाद मृतका के पिता राजेन्द्र राय (बरकट्ठा) हजारीबाग के गैंडा गांव निवासी ने बरवाअड्डा थाना में हत्या की प्राथमिकी दर्ज करायी. केस के आइओ दिनेश कुमार ने आठ जनवरी 18 को चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र समर्पित किया. अदालत ने 29 मई 18 को आरोप गठन कर केस का विचारण शुरू किया. अभियोजन का संचालन करते हुए लोक अभियोजक टीएन उपाध्याय ने 14 गवाहों की गवाही करायी थी.
