124 फरजी लोगों ने पायी नौकरी

रांची: सीसीएल में 124 से अधिक लोगों को फरजी तरीके से नौकरी दी गयी है. इसकी पुष्टि प्रारंभिक जांच में हुई है. सीसीएल प्रबंधन ने ऐसे कर्मियों को चाजर्शीट दिया है. दो साल बाद प्रबंधन ने इस पर अंतिम निर्णय लिया है. जिन लोगों के नाम से नौकरी ली गयी है, उसे बार-बार आश्वासन दिया […]

रांची: सीसीएल में 124 से अधिक लोगों को फरजी तरीके से नौकरी दी गयी है. इसकी पुष्टि प्रारंभिक जांच में हुई है. सीसीएल प्रबंधन ने ऐसे कर्मियों को चाजर्शीट दिया है. दो साल बाद प्रबंधन ने इस पर अंतिम निर्णय लिया है. जिन लोगों के नाम से नौकरी ली गयी है, उसे बार-बार आश्वासन दिया जा रहा है.

क्या है मामला : 1990 में एमएस सीसी लिमिटेड कंपनी के अधीन 324 मजदूर स्वांग वाशरी के स्लरी पौंड में काम करते थे. ये स्थायीकरण की लड़ाई लड़ रहे थे. इसकी शिकायत कर्मियों ने सहायक श्रमायुक्त से की थी. यह मामला सहायक श्रमायुक्त से होते हुए सेंट्रल गवर्मेट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल नंबर-1 (सीजीआइटी) धनबाद में चला गया. वहां से फैसला मजदूरों के पक्ष में आया. इसके विरोध में कंपनी सुप्रीम कोर्ट चली गयी. सुप्रीम कोर्ट ने भी सीजीआइटी के फैसले को सही ठहराया. 2002 में सभी कर्मियों को नौकरी देने का आदेश दिया. तय किया गया कि सही मजदूरों की पहचान इनके हक की लड़ाई लड़नेवाली यूनियन करेगी.

ऐसे शुरू हुआ खेल

ठेकेदार मजदूर यूनियन और सीसीएल को यह जिम्मेदारी मिली कि सही मजदूरों की पहचान करे. पूरे मामले पर अंतिम निर्णय होते-होते आठ साल गुजर गये. 2010 में कर्मियों को नौकरी देने की बारी आयी. पहले चरण में 142 कर्मियों की पहचान कर नौकरी दी गयी. दरअसल जिन 142 लोगों को नौकरी दी गयी, उसमें अधिसंख्य एमएस सीसी लिमिटेड में काम करनेवाले कर्मी नहीं थे. यूनियन की पहचान पर प्रबंधन ने वैसे लोगों को नौकरी दे दी, जिनका इस मामले से लेना-देना नहीं था. इस वक्त सीसीएल में टीके चांद निदेशक कार्मिक, भगवान पांडेय जीएम आइआर तथा केके सिंह जांच अधिकारी थे. सभी नौकरी भी करने लगे. शुरुआत के तीन माह इन लोगों को 10 हजार रुपये प्रति माह मिला. उसके बाद कैटगरी-1 की नौकरी दे दी गयी.

नौकरी के लिए मजदूरों ने किया था आंदोलन

असली दैनिक मजदूरों को प्रबंधन से जानकारी मिली कि अदालत के फैसले के आलोक में नौकरी दे दी गयी है. इसके बाद एक-एक कर सभी मजदूर एकजुट हुए. इसकी शिकायत सीसीएल से की. कहा कि अदालत से जीतनेवालों को नौकरी नहीं मिली है. बाद में बेरमो अनुमंडल विस्थापित-प्रभावित संघर्ष मोरचा के बैनरत ले व्यापक आंदोलन शुरू किया गया. इसके बाद पूरे मामले की जांच करायी गयी. जांच के बाद करीब 124 कर्मियों को चाजर्शीट दी गयी है.

टर्मिनेट करने का प्रावधान

मामले पर अंतिम निर्णय होने के बाद यूनियन और सीसीएल के बीच तय हुआ था कि गलत पात्रता पाये जाने की स्थिति में सर्विस से टर्मिनेट कर दिया जायेगा. द झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के महासचिव सनत मुखर्जी का कहना है कि यहां छोटे-छोटे मामले में निलंबित कर दिया जाता है. दो साल से गलत ढंग से नौकरी पाने की पुष्टि हो गयी है, लेकिन एक को भी नहीं हटाया गया है. उनको निलंबित तक नहीं किया गया है.

स्वांग एवं करगली वाशरी में कार्यरत वैसे कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई जारी है. इस मामले में बेरमो, अनुमंडल प्रभावित विस्थापित संघर्ष मोरचा द्वारा उपरोक्त वैसे कर्मचारियों के विरुद्ध प्रमाण/साक्ष्य /कागजात संबंधित महाप्रबंधक (करगली और कथारा) को उपलब्ध कराया जायेगा. इससे आगे की कार्रवाई हो सकेगी.

आरएस महापात्र, महाप्रबंधक

कार्मिक व औद्योगिक संबंध

(10 जून 2014 को लिखित जवाब)

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