नयी दिल्ली/रांची: झारखंड के ग्रामीण विकास को गति देने के लिए केंद्रीय मदद बेहद जरूरी है. नक्सल प्रभावित राज्य होने के साथ ही राज्य में लगभग 50 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है.
राज्य के सर्वागीण ग्रामीण विकास के लिए झारखंड के ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री केएन त्रिपाठी ने केंद्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री गोपीनाथ मुंडे से मिलकर राज्य की जरूरतों पर चरचा की. लगभग एक घंटे की चरचा के दौरान त्रिपाठी ने राज्य में ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं में केंद्रीय सहयोग से संबंधित बातचीत की. उन्होंने कहा कि गोपीनाथ मुंडे ने भरोसा दिया कि राज्य की जरूरतों को पूरा करने में केंद्र सरकार हर संभव मदद करेगी.
यह बैठक एक घंटे से अधिक चली. झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री ने पूरा के तहत केंद्र सरकार से 8940 करोड़ रुपये की मांग की है. उन्होंने कहा कि राज्य में कुल 4423 पंचायतें हैं, जिसमें से 3154 नक्सल प्रभावित और 894 अति नक्सल प्रभावित हैं.
नक्सल प्रभावित क्षेत्र को लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए बुनियादी सुविधाओं पानी, स्वास्थ्य और बिजली की व्यवस्था करना जरूरी है. अति नक्सल प्रभावित प्रति पंचायतों को 10 करोड़ रुपये का आवंटन करने से विकास की गति तेज हो सकेगी. राज्य के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत केंद्र सरकार से 3150 करोड़ रुपये की मांग की गयी है. केएन त्रिपाठी ने कहा कि राज्य में बीपीएल परिवारों की संख्या काफी है, लेकिन पिछले साल 1.30 इंदिरा आवास देने की योजना को घटाकर 49 हजार कर दिया गया और हमने केंद्रीय मंत्री से इसे प्रति वर्ष 2 लाख करने की मांग की है.
