कृषि के लिए मशहूर पंजाब कैसे आ गया ड्रग की चपेट में, पूर्व IPS अधिकारी अरूण उरांव ने बताया

अरुण उरांव ने बताया कि पंजाब में भ्रष्ट नेताओं व भ्रष्ट पुलिस अफसरों ने मिलकर उड़ता पंजाब की स्क्रिप्ट लिखी थी. इसने पंजाब की दो पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया. 1980 के दशक के बाद पंजाब में खालिस्तानी मूवमेंट शुरू हुआ था.

पंजाब में युवाओं ने अफीम का नशा शुरू किया. इसके बाद हेरोइन, स्मैक, कोकिन, सिंथेटिक ड्रग, आइस ड्रग जैसे महंगे नशे की जद में फंसते चले गये. देखते ही देखते कृषि के लिए प्रसिद्ध पंजाब ””उड़ता पंजाब”” बन गया. ड्रग्स की भयावहता को लेकर भारतीय पुलिस सेवा के पंजाब कैडर से रिटायर्ड सीनियर आइपीएस अधिकारी डॉ अरुण उरांव से प्रभात खबर ने बात की.

श्री उरांव ने बताया कि पंजाब में भ्रष्ट नेताओं व भ्रष्ट पुलिस अफसरों ने मिलकर उड़ता पंजाब की स्क्रिप्ट लिखी थी. इसने पंजाब की दो पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया. 1980 के दशक के बाद पंजाब में खालिस्तानी मूवमेंट शुरू हुआ था. उस समय पाकिस्तान के आइएसआइ ने खालिस्तानियों को अवैध हथियार मुहैया करा कर आतंकवाद को बढ़ावा दिया. वहीं राज्य की आर्थिक स्थिति को बर्बाद करने के लिए जाली करेंसी की खेप भी भेजने लगा. साथ ही युवाओं को बर्बाद करने के लिए ड्रग्स की खेप पंजाब भेजने लगा. इसके लिए पाकिस्तान-अफगानिस्तान से पंजाब तक गोल्डन ट्राइंगल बना दिया. इसके बाद पंजाब से देश के दूसरे हिस्सों में भी ड्रग्स की सप्लाई की जाने लगी.

जांच में यह बात भी सामने आयी कि पंजाब पुलिस का एक डीएसपी खुद ड्रग सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा था. उस समय राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री रहे बिक्रम मजीठिया का नाम उक्त डीएसपी को संरक्षण देने के तौर पर सामने आया था. उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

800 कांस्टेबल की भर्ती में पंजाब के लड़के पिछड़ गये

डॉ अरुण उरांव ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस में 800 कांस्टेबल की भर्ती निकली थी. इसमें पंजाब व हरियाणा के युवाओं को विभागीय प्रक्रिया के तहत शामिल होने का मौका दिया गया. उस वक्त वे डीआइजी के पद पर थे. बहाली में अधिकांश सीटों पर हरियाणा के युवाओं का चयन हुआ. कुछ ही पंजाब के लड़के चुने गये. जांच में बात सामने आयी कि पंजाब के लड़के फिजिकल परीक्षा में सफल नहीं हुए. वे बहाली में दौड़ भी नहीं पा रहे थे. यह सब ड्रग्स की वजह से था.

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By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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