VIDEO: ‘जेल जाएंगे, जान देंगे, जमीन नहीं देंगे’, पटना में किसानों का हल्लाबोल; बोले- मुआवजे से पेट नहीं भरेगा, खेत चाहिए

पटना में किसानों का हल्लाबोल

पटना में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. प्रस्तावित खेल गांव और अन्य परियोजनाओं के लिए उपजाऊ जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसान सड़कों पर उतर आए हैं. वे मुआवजे के बजाय अपनी जमीन चाहते हैं.

Patna Farmer Protest : राजधानी में छात्रों के आंदोलन के बीच अब किसान भी अपनी जमीन बचाने के लिए सड़क पर उतर आए हैं. डाकबंगला चौराहे पर पुनपुन प्रखंड से पहुंचे किसानों ने प्रस्तावित खेल गांव, फॉरेंसिक लैब और पाटलिपुत्र सैटेलाइट सिटी के लिए जमीन लिये जाने का विरोध किया. किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अपनी उपजाऊ जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे. प्रदर्शन के दौरान कुछ किसानों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया.

‘जमीन बचानी है, सरकार से बचानी है’

प्रदर्शन में शामिल अखिलेश सिंह ने कहा कि किसान अपनी उपजाऊ जमीन बचाने के लिए सड़क पर उतरे हैं. उन्होंने बताया कि पुनपुन प्रखंड के डुमरी मौजा समेत आसपास की जमीन अलग-अलग सरकारी परियोजनाओं के लिए लिये जाने की बात सामने आ रही है. किसानों का कहना है कि यह जमीन बेहद उपजाऊ है और इससे उनका परिवार वर्षों से खेती के जरिये चलता आ रहा है.

खेल गांव और फॉरेंसिक लैब के लिए भी जमीन जाने का दावा

किसानों ने बताया कि पहले खेल गांव के लिए जमीन लिये जाने की बात सामने आयी. इसके बाद फॉरेंसिक लैब और अब पाटलिपुत्र सैटेलाइट सिटी के लिए भी जमीन लिये जाने की बात कही जा रही है. किसानों के अनुसार कुल मिलाकर करीब 100 एकड़ जमीन प्रभावित हो सकती है. उनका कहना है कि लगातार जमीन जाने से खेती पर निर्भर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा.

‘चार फसल देने वाली जमीन चली गयी तो क्या खाएंगे?’

अखिलेश सिंह ने कहा कि डुमरी मौजा की जमीन बेहद उपजाऊ है. यहां किसान मक्का, धान, गेहूं, दलहन, मसूर और प्याज समेत कई फसलें उगाते हैं. किसानों का कहना है कि ऐसी जमीन पर निर्माण होने से केवल खेत नहीं जाएंगे, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियों की आजीविका भी प्रभावित होगी.

‘मुआवजे से पेट नहीं भरेगा, जमीन से फसल मिलेगी’

प्रदर्शनकारी विनय सिंह ने बताया कि उनकी करीब पांच एकड़ जमीन स्टेडियम के लिए प्रभावित हो रही है. उन्होंने मुआवजे की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार जमीन की कीमत का मुआवजा दे सकती है, लेकिन एक बार मिला पैसा खत्म हो जाएगा. इसके बाद परिवार की आमदनी का स्थायी साधन क्या रहेगा? किसानों का कहना है कि जमीन से हर साल फसल मिलती है, इसलिए वे केवल मुआवजा नहीं, अपनी जमीन चाहते हैं.

‘दो-चार गुना पैसा देने से भी समस्या खत्म नहीं होगी’

किसानों ने कहा कि सरकार शहरीकरण के हिसाब से जमीन का मुआवजा देने की बात कर सकती है, लेकिन इससे उनकी मूल समस्या का समाधान नहीं होगा. किसानों का कहना है कि जमीन का वास्तविक मूल्य केवल उसकी बाजार कीमत नहीं है, बल्कि उससे होने वाली लगातार आमदनी भी है. इसलिए मुआवजे के बजाय उपजाऊ जमीन को परियोजनाओं से बचाने की मांग की जा रही है.

हिरासत में लिये किसानों ने कहा- ‘जेल जाएंगे, जान देंगे, जमीन नहीं देंगे’

प्रदर्शन के दौरान कुछ किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया. हिरासत में लिये गये किसानों ने भी अपना विरोध जारी रखा. उन्होंने कहा, ‘जेल जाएंगे, जान देंगे, जमीन नहीं देंगे.’ किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी जमीन ले रही है और वे इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे.

‘सरकार जमीन हड़प रही है, हम नहीं हड़पने देंगे’

पुलिस द्वारा हिरासत में लिये गये किसानों ने कहा कि उनकी मांग केवल अपनी जमीन बचाने की है. उनका आरोप था कि सरकार परियोजनाओं के नाम पर किसानों की जमीन ले रही है. किसानों ने कहा कि वे अपनी मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे और जमीन बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे.

छात्रों के बाद किसानों के सड़क पर उतरने से बढ़ी हलचल

डाकबंगला चौराहे पर मंगलवार को पहले बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान किसान भी अपनी जमीन से जुड़े मुद्दे को लेकर वहां पहुंचे. एक ओर छात्र सरकार से अपनी मांगों पर बातचीत की मांग कर रहे हैं, वहीं किसानों का कहना है कि उनकी जमीन बचाने के लिए सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए.

अब सरकार के रुख पर टिकी नजर

किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उपजाऊ खेती की जमीन लिये जाने का विरोध करेंगे. किसानों का कहना है कि सरकार को परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक जमीन तलाशनी चाहिए. अब देखना होगा कि किसानों के विरोध और उनकी जमीन से जुड़ी मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है.

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By विवेक सिंह

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