बिटिया की डोली निकलने के पहले उठी पिता की अरथी

हाजीपुर/प्रेमराज : गोरौल प्रखंड क्षेत्र के पिरोई समशुद्दीन पंचायत के बड़ी पिरोई गांव के वार्ड संख्या छह में सोमवार को उस समय कोहराम मच गया उसी गांव निवासी सकलदीप दास(50) का शव उसके पैतृक घर पर पहुंचा. शव पहुंचने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण उसके घर पर पहुंच गये. एक तरफ परिजन चीत्कार मार कर […]

हाजीपुर/प्रेमराज : गोरौल प्रखंड क्षेत्र के पिरोई समशुद्दीन पंचायत के बड़ी पिरोई गांव के वार्ड संख्या छह में सोमवार को उस समय कोहराम मच गया उसी गांव निवासी सकलदीप दास(50) का शव उसके पैतृक घर पर पहुंचा. शव पहुंचने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण उसके घर पर पहुंच गये.

एक तरफ परिजन चीत्कार मार कर रो रहे थे, तो दूसरी तरफ वहां पहुंचे ग्रामीणों के आंख नम थे. लोगों के बीच एक ही चर्चा हो रही थी कि दस दिन बाद इस घर से बेटी की डोली निकलने थी, लेकिन इससे पहले ही पिता की अर्थी निकली.
जानकारी के अनुसार सकलदीप की तीसरी बेटी प्रतिमा की शादी 15 जून को होने वाली थी. वह बेटी की शादी का निमंत्रण पत्र लेकर अपने रिश्तेदारों को देने के लिए घर से निकला था. इसी दौरान महम्मदपुर दरिया के हरशेर चौक के समीप एक अनियंत्रित बाइक सवार चालक ने उसकी बाइक में धक्का मार दिया. जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया.
अस्पताल पहुंचने के पहले हो गयी थी मौत: स्थानीय लोगों ने उसे आनन-फानन में गोरौल पीएचसी में भर्ती कराया. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इधर घटना की सूचना मिलते ही गोरौल थाने की पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हाजीपुर सदर अस्पताल भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद शव सोमवार को उसके पैतृक घर पर पहुंचा. शव पहुंचते ही परिजनों व ग्रामीणों में कोहराम मच गया.
परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था. सकलदीप की पत्नी नीलम देवी ने बतायी कि उसे चार पुत्री और दो पुत्र हैं. जिसका भरण पोषण उसके पति ही कमा कर करते थे. दो पुत्रियों की शादी हो चुकी है. तीसरी पुत्री की शादी 15 जून को होनी थी. जिले के महनार के देशराजपुर गांव निवासी रामनरेश दास के पुत्र रंजीत कुमार से शादी तय थी और उसी शादी का निमंत्रण रिश्तेदारों को देने के लिए घर से निकले थे.
ग्रामीण डाॅ रविकांत मनी, नागेश्वर दास, उप प्रमुख संजय कुमार, हरेंद्र दास, गणेश दास, शिवनाथ दास आदि ने बताया कि सकलदीप दास माता- पिता का इकलौता पुत्र था. पिता जंग बहादुर दास के निधन के बाद उसके कंधे पर परिवार के भरण-पोषण का बोझ आ गया. दोनों पुत्र नाबालिग हैं. लोगों ने मृतक के परिजनों को सरकारी मुआवजा दिये जाने की मांग स्थानीय प्रशासन से की है.

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