राखी बांधने आई हजारों छात्राएं, रौशन आनंद ने दिया तोहफा

VIDEO: राखी पर रौशन आनंद ने दिया ऐसा तोहफा कि रह गई दंग; आधी संपत्ति के साथ फ्री लाइब्रेरी-किताबों का ऐलान

पटना में गुरु-शिष्य के रिश्ते की अनूठी मिसाल पेश करते हुए, शिक्षक रोशन आनंद ने अपने संस्थान में छात्राओं के साथ रक्षाबंधन का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने छात्राओं के लिए 84 तरह के व्यंजन और फ्री लाइब्रेरी व किताबों की सुविधा का ऐलान किया.

Raushan Anand Rakhi Celebration 2026 : रक्षाबंधन के मौके पर पटना में इस बार गुरु-शिष्य के रिश्ते की अनोखी तस्वीर देखने को मिली. शिक्षक रोशन आनंद ने अपने कोचिंग संस्थान में पहली बार छात्राओं के साथ रक्षाबंधन का आयोजन किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं पहुंचीं और रोशन आनंद को राखी बांधी. इस दौरान छात्राओं के लिए 84 तरह के व्यंजनों की व्यवस्था की गयी. कार्यक्रम में जहां गुरु-शिष्य के स्नेह और सम्मान का भाव दिखा, वहीं रोशन आनंद ने छात्रों की मांगों को लेकर बिहार सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम भी दिया.

पहली बार संस्थान में मनाया रक्षाबंधन

रोशन आनंद ने कहा कि उन्होंने जीवन में पहली बार इस तरह रक्षाबंधन का आयोजन किया है. उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से आज तक इस तरह का रक्षाबंधन नहीं मनाया. इस बार बड़ी संख्या में छात्राओं के साथ संस्थान में रक्षाबंधन मनाने का अवसर मिला, जिसे उन्होंने अपने जीवन का सबसे खास रक्षाबंधन बताया.

हजारों छात्राओं ने बांधी राखी

रक्षाबंधन कार्यक्रम में हजारों छात्राएं शामिल हुईं. छात्राओं ने रोशन आनंद को राखी बांधकर उनके प्रति अपना स्नेह और सम्मान जताया. रोशन आनंद ने कहा कि छात्राओं को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता रहेगी. उन्होंने छात्राओं के लिए लाइब्रेरी को मुफ्त करने और जरूरत के अनुसार किताबें उपलब्ध कराने की बात कही.

84 तरह के व्यंजनों से छात्राओं का स्वागत

कार्यक्रम में छात्राओं के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की गयी थी. रोशन आनंद ने बताया कि आमतौर पर 56 प्रकार के भोजन की चर्चा होती है, लेकिन उन्होंने अपनी बहनों के लिए 84 तरह के व्यंजनों की व्यवस्था की. कार्यक्रम में छात्राओं के उत्साह के साथ भोजन को लेकर भी विशेष आकर्षण देखने को मिला.

छात्रों की मांगों को लेकर सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम

रक्षाबंधन समारोह के दौरान रोशन आनंद ने छात्रों की मांगों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि 15 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन चल रहा था और वे 22 अगस्त को गर्दनीबाग पहुंचे थे. वहां मौजूद छात्राओं ने उनसे कहा था कि यदि रक्षाबंधन से पहले सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है, तो रक्षाबंधन गर्दनीबाग में ही मनाया जाए.

सरकार के फैसले के बाद संस्थान में हुआ आयोजन

रोशन आनंद के अनुसार, 27 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने एक्स हैंडल के माध्यम से छात्रों की कुछ मांगों को आंशिक रूप से स्वीकार करने की जानकारी दी. इसी के बाद खुशी के अवसर पर संस्थान में पहली बार रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया. उन्होंने कहा कि छात्राओं की पढ़ाई में जितनी मदद संभव होगी, वे करते रहेंगे.

लाइब्रेरी और किताबों की सुविधा देने का ऐलान

रोशन आनंद ने छात्राओं के लिए पढ़ाई का बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की बात कही. उन्होंने कहा कि छात्राओं को मुफ्त लाइब्रेरी की सुविधा दी जाएगी और जरूरत के अनुसार किताबें भी उपलब्ध करायी जाएंगी, ताकि वे बेहतर तरीके से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें.

एक महीने में मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन की चेतावनी

रोशन आनंद ने कहा कि छात्रों की कई मांगें अभी भी बाकी हैं. उन्होंने एसएससी परीक्षा से जुड़े छात्रों के मुद्दों और 70वीं बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग का भी उल्लेख किया. उन्होंने सरकार को एक महीने का समय देते हुए कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे छात्रों के साथ सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे.

दिवंगत सहयोगी को याद कर भावुक हुए रोशन आनंद

कार्यक्रम के दौरान जब उनके एक दिवंगत सहयोगी से जुड़ा सवाल पूछा गया, तो रोशन आनंद भावुक हो गये. उन्होंने कहा कि उस घटना का दुख जीवनभर रहेगा और वे उसे कभी नहीं भूल सकते. उन्होंने कहा कि उनका भाई भले ही आज उनके बीच नहीं है, लेकिन वह उनके भीतर हमेशा जिंदा है. उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन मनाने की प्रेरणा उन्हें आंतरिक रूप से अपने दिवंगत सहयोगी से भी मिली.

हर साल छात्राओं के साथ मनाया जाएगा रक्षाबंधन

रोशन आनंद ने कहा कि संस्थान में इस बार पहली बार रक्षाबंधन मनाया गया है, लेकिन अब यह आयोजन हर साल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि छात्राओं के साथ यह पर्व गुरु-शिष्य के रिश्ते को और मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें पढ़ाई और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का माध्यम भी बनेगा.

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By विवेक सिंह

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