पारख जैन भवन परिसर में व्याहुत कलवार समाज ने धूमधाम से मनाया बलभद्र पूजनोत्सव

भगवान बलराम को बलदाऊ या बलभद्र के रुप में भी माना जाता है.

प्रतापगंज. बाजार स्थित पारख जैन भवन परिसर में शुक्रवार को व्याहुत कलवार संघ द्वारा आयोजित कुल देवता बलभद्र की पूजा सह जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया. सुसज्जित पंडाल में संजीव कुमार भगत और उनकी धर्मपत्नी सावित्री देवी द्वारा भगवान बलभद्र की भव्य और आकर्षक प्रतिमा स्थापित कर पंडित बलराम उपाध्याय द्वारा मंत्रोच्चार के बीच अनुयायियों ने पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की. इस मौके पर प्रतापगंज सहित सुरजापुर, उधमपुर, मधुबनी, सरायगढ़, जीबछपुर, भागवतपुर के सैकड़ों व्याहुत परिवार के महिला पुरुष बच्चे पूजनोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया. व्याहुत परिवार के कुल देवता बलभद्र की जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए पंडित बलराम ने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार बलराम जी का जन्म रोहिणी के गर्भ से भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी को हुआ था. भगवान बलराम को बलदाऊ या बलभद्र के रुप में भी माना जाता है. पंडित जी के अनुसार उन्हें संकर्षण अवतार भी कहा जाता है. बलराम जी भगवान विष्णु के अंश माने जाते हैं. बलराम जी को हल लेकर चलने के कारण हलधर भी कहा जाता है. जन्मोत्सव के दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रख बच्चों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं. उन्होंने बताया कि देश के कई प्रदेशों में कलवार समाज के लोग के कुल देवता बलभद्र जी हैं. बिहार के व्याहुत कलवार समाज के लोग भी बलभद्र जी को अपना कुल देवता मानते हैं. उन्होंने बताया कि बलभद्र मनावना परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर भी है. जो प्रेम पंरपरा, आशीर्वाद, कृषक संस्कृति और कुल मर्यादा को एक सूत्र में बांधती है. इस परंपरा को निभाकर व्याहुत समाज विश्वास करता है कि बलराम जी कृपा से विवाह निर्विध्न मंगलमय होने का प्रतीक माना जाता है. बताया की बलराम जयंती जिसे ललही छठ भी कहा जाता है. बताया कि बलराम जी को धर्म रक्षक और राक्षसों का वध करने वाला देवता के रूप में वर्णित किया गया है. इस मौके पर व्याहुत कलवार संघ की ओर से श्रावक समाज के लिए महा प्रसाद का भी आयोजन किया गया. रात्रि में जागरण का कार्यक्रम रखा गया. पूजनोत्सव के मौके पर मुख्य रूप से राजकुमार भगत, अवधेश भगत, निर्मल भगत, दिलीप भगत, दीपक भगत, अभिषेक भगत, अनमोल भगत, निखिल भगत, विमलेश भगत, राजकिशोर भगत, कंचन देवी, रीता देवी, वंदना देवी, अनिता देवी, सविता देवी आदि श्रद्धालु उपस्थित थे.

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