Triveniganj Snake Bite: सुपौल में सांप के काटने के बाद समय पर इलाज मिलना जिंदगी बचाने में बेहद अहम हो सकता है, लेकिन त्रिवेणीगंज में एक परिवार अंधविश्वास के कारण सर्पदंश पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बजाय तांत्रिक के पास लेकर चला गया. झाड़-फूंक के बाद तांत्रिक ने खतरा टलने की बात कहकर पीड़ित को घर ले जाने को कहा. इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गयी.
मामला नगर परिषद क्षेत्र के पतरघट्टी वार्ड नंबर 4 का है. यहां शुक्रवार देर शाम खेत में पटवन कर रहे 45 वर्षीय बीरेंद्र यादव को जहरीले सांप ने बाएं पैर में डस लिया था. घटना के बाद परिजन उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलाने के बजाय तांत्रिक के पास लेकर चले गये.
खेत में पटवन के दौरान सांप ने डसा
जानकारी के अनुसार पतरघट्टी वार्ड नंबर 4 निवासी पांचो यादव के 45 वर्षीय पुत्र बीरेंद्र यादव शुक्रवार की देर शाम अपने धान के खेत में पटवन कर रहे थे.
इसी दौरान एक विषैले सांप ने उनके बाएं पैर में डस लिया. सांप के काटने के बाद परिजनों को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, वे बीरेंद्र को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने के लिए तांत्रिक के पास लेकर चले गये.
तांत्रिक ने कहा- अब कुछ नहीं होगा
परिजनों के अनुसार तांत्रिक ने झाड़-फूंक करने के बाद उन्हें आश्वस्त किया कि अब बीरेंद्र को कुछ नहीं होगा और उसे घर ले जाने की सलाह दी.
परिजन तांत्रिक की बात मानकर बीरेंद्र को घर वापस ले आये. लेकिन कुछ समय बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी. इसके बाद परिवार के लोग उसे लेकर अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज पहुंचे.
पैर में बढ़ने लगी सूजन, हालत देख डॉक्टर ने किया रेफर
अस्पताल पहुंचने पर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. श्रवण कुमार ने पीड़ित का प्राथमिक उपचार शुरू किया. चिकित्सक के अनुसार सर्पदंश के बाद पीड़ित के बाएं पैर में सूजन बढ़ने लगी थी.
डॉक्टर ने बताया कि परिजनों ने जानकारी दी कि सांप के काटने के बाद वे पीड़ित को ओझा के पास लेकर चले गये थे और अचानक हालत खराब होने के बाद अस्पताल पहुंचे.
अस्पताल में उपचार के बाद पीड़ित की स्थिति में सुधार बताया गया, लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल सुपौल रेफर कर दिया गया.
झाड़-फूंक में समय गंवाना पड़ सकता है भारी
सर्पदंश के मामले में यह घटना एक बार फिर बताती है कि अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में इलाज में देरी कितनी खतरनाक हो सकती है. जहरीले सांप के काटने के बाद शरीर में जहर का असर तेजी से बढ़ सकता है. ऐसे में समय पर चिकित्सकीय उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है.
पीड़ित के परिजनों को अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण उसकी हालत गंभीर होने की स्थिति बनी. हालांकि समय पर अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया और बेहतर इलाज के लिए उसे सुपौल रेफर कर दिया.
Triveniganj Snake Bite: सर्पदंश में अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी
सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए. सांप को पकड़ने या उसके पीछे भागने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे दोबारा काटे जाने का खतरा रहता है.
त्रिवेणीगंज की यह घटना ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत भी सामने लाती है. खासकर खेतों में काम करने वाले लोगों और उनके परिवारों को यह समझना जरूरी है कि सर्पदंश के बाद हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है.
