Triveniganj Football Tournament: त्रिवेणीगंज के डपरखा में रविवार की शाम फुटबॉल का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया. मैदान में हजारों दर्शकों की भीड़ थी और हर नजर गेंद पर टिकी थी. कभी डपरखा के हमले पर तालियां गूंजतीं तो कभी भीमनगर के खिलाड़ी बराबरी के लिए जोर लगाते नजर आए. लेकिन पूरे मुकाबले में डपरखा की टीम ने बेहतर तालमेल और शानदार बचाव के दम पर अपना दबदबा बनाए रखा. आखिरकार डपरखा ने भीमनगर को 2-0 से हराकर स्व. अमरेन्द्र यादव मेमोरियल फुटबॉल टूर्नामेंट स्मृति कप अपने नाम कर लिया.
मुकाबला त्रिवेणीगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 24 स्थित मध्य विद्यालय डपरखा के खेल मैदान में खेला गया. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल को लेकर इलाके में पहले से ही खास उत्साह था. मैच शुरू होने से पहले ही मैदान के चारों ओर बड़ी संख्या में खेलप्रेमी और स्थानीय ग्रामीण पहुंच चुके थे.
खिलाड़ियों से परिचय के बाद शुरू हुआ रोमांचक मुकाबला
फाइनल मुकाबले से पहले मौजूद अतिथियों ने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया. उन्होंने खिलाड़ियों से अनुशासन के साथ खेलने और खेल भावना को मजबूत करने की अपील की. इसके बाद जैसे ही मैच शुरू हुआ, दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाना शुरू कर दिया.
मैदान के चारों तरफ मौजूद हजारों दर्शक हर पास, हर हमले और गोल के प्रयास पर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते रहे. दोनों टीमों के बीच शुरुआती दौर में गेंद पर कब्जे को लेकर कड़ा संघर्ष देखने को मिला.
पहले हाफ में डपरखा ने बनाई बढ़त
मुकाबले के पहले हाफ में डपरखा के खिलाड़ियों ने बेहतर तालमेल के साथ खेलते हुए भीमनगर के गोल पोस्ट पर लगातार दबाव बनाया. इसका फायदा टीम को मिला और डपरखा ने पहला गोल दागकर मुकाबले में बढ़त हासिल कर ली.
गोल खाने के बाद भीमनगर की टीम ने वापसी की कोशिश तेज कर दी. खिलाड़ियों ने कई जोरदार हमले किए और बराबरी का गोल करने का प्रयास किया. हालांकि डपरखा की रक्षापंक्ति ने शानदार बचाव करते हुए भीमनगर के हमलों को गोल में बदलने नहीं दिया.
मध्यांतर तक डपरखा की टीम 1-0 से आगे रही.
दूसरे हाफ में दूसरा गोल, मजबूत हुई पकड़
मध्यांतर के बाद भीमनगर की टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बराबरी करने की थी. टीम ने आक्रामक खेल के साथ वापसी की कोशिश की, लेकिन डपरखा के खिलाड़ियों ने दबाव के बावजूद अपना संयम बनाए रखा.
इसके बाद डपरखा ने एक बार फिर आक्रमण तेज किया और दूसरा गोल दाग दिया. इस गोल के साथ डपरखा की बढ़त 2-0 हो गई. इसके बाद भीमनगर के खिलाड़ियों ने कई बार गोल करने की कोशिश की, लेकिन डपरखा की टीम ने बेहतरीन बचाव करते हुए अपनी बढ़त कायम रखी.
मैच के अंतिम मिनटों में दोनों टीमों के बीच जोरदार संघर्ष देखने को मिला. भीमनगर के खिलाड़ी लगातार बराबरी के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन डपरखा के डिफेंस को भेद नहीं सके. निर्णायक सीटी बजते ही डपरखा के खिलाड़ी और समर्थक खुशी से झूम उठे.
हजारों दर्शकों से गूंजता रहा खेल मैदान
पूरे मैच के दौरान दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था. जैसे ही कोई खिलाड़ी गेंद लेकर विपक्षी टीम के गोल पोस्ट की ओर बढ़ता, मैदान के चारों ओर से जोरदार आवाजें आने लगतीं. गोल के प्रयासों के दौरान दर्शकों की धड़कनें बढ़ जातीं और सफल हमले पर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती.
मैच के दौरान खेल मैदान तालियों और उत्साहपूर्ण नारों से गूंजता रहा. फाइनल मुकाबले ने यह भी दिखाया कि त्रिवेणीगंज और आसपास के इलाके में फुटबॉल को लेकर लोगों की दिलचस्पी अब भी काफी मजबूत है.
विजेता और उपविजेता टीम को मिली ट्रॉफी
मैच समाप्त होने के बाद आयोजक एवं डपरखा टीम के कप्तान सानू यादव, पैक्स अध्यक्ष अश्वनी कुमार उर्फ डब्लू, सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र यादव, नवीन कुमार उर्फ बोआ यादव सहित अन्य अतिथियों ने विजेता डपरखा और उपविजेता भीमनगर की टीम को शील्ड और पुरस्कार प्रदान किया.
टूर्नामेंट को सफल बनाने में सहयोग करने वाले लोगों को भी आयोजक की ओर से सम्मानित किया गया.
इस मौके पर अतिथियों ने कहा कि खेल में जीत और हार लगी रहती है. एक टीम जीतती है तो दूसरी टीम को अपनी कमियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का मौका मिलता है. खेल खिलाड़ियों को अनुशासन, संघर्ष और टीम भावना की सीख देता है.
Triveniganj Football Tournament: हर साल होगा स्मृति कप का आयोजन
फुटबॉल मैच के आयोजक सानू यादव ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी मध्य विद्यालय डपरखा के खेल मैदान में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे. हजारों की भीड़ यह बताती है कि क्षेत्र में फुटबॉल को लेकर लोगों का जुनून आज भी बरकरार है.
उन्होंने कहा कि आगे भी उनके द्वारा फुटबॉल टूर्नामेंट स्मृति कप का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि क्षेत्र के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता रहे.
मैच में उद्घोषक की भूमिका शैलेंद्र यादव और पिंकू कुमार ने निभाई, जबकि निर्णायक की भूमिका शेख अब्दुल्ला ने निभाई. फाइनल मुकाबले को देखने के लिए बड़ी संख्या में खेलप्रेमी और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे.
