खाद दुकान पर छापे में मिली गड़बड़ी, फिर कैसे बदल गई तस्वीर? त्रिवेणीगंज में कृषि विभाग की कार्रवाई पर बड़े सवाल

त्रिवेणीगंज की पूजा ट्रेडर्स खाद दुकान के लाइसेंस निलंबन और फिर निलंबन से मुक्ति के मामले ने किसानों को बेचैन कर दिया है. शुरुआती जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद कार्रवाई हुई, लेकिन बाद में दुकानदार को राहत मिल गई. स्थानीय लोगों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है.

Supaul News: त्रिवेणीगंज में खाद की एक दुकान से जुड़ा मामला इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है. 4 अगस्त को जांच के दौरान अनियमितताएं मिलने के बाद जिस पूजा ट्रेडर्स का लाइसेंस निलंबित किया गया था और खाद की बिक्री पर रोक लगायी गयी थी, उसी दुकान को बाद में निलंबन से मुक्त कर दिया गया.

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि शुरुआती जांच में सामने आये बिंदुओं के बाद कार्रवाई हुई और फिर बाद की रिपोर्ट के आधार पर दुकानदार को राहत मिल गयी. स्थानीय किसानों और लोगों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.

हालांकि, दुकान संचालक या संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह के आर्थिक लेन-देन का आरोप अभी जांच में साबित नहीं हुआ है. इसलिए इस संबंध में सामने आ रही चर्चाओं को आरोप और आशंका के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

4 अगस्त की छापेमारी में क्या मिला था?

जिला कृषि पदाधिकारी के निर्देश पर 4 अगस्त को प्रखंड कृषि पदाधिकारी, त्रिवेणीगंज की टीम ने नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 25 स्थित पूजा ट्रेडर्स की जांच की थी.

जांच के दौरान दुकान के लाइसेंस में दर्ज पते और दुकान के संचालन स्थल को लेकर अनियमितता बतायी गयी. इसके अलावा दुकान में डिस्प्ले बोर्ड नहीं होने और वास्तविक स्टॉक तथा पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक के बीच अंतर मिलने की बात सामने आयी.

जांच टीम ने बिना बिल के 'हरा सोना' नामक मिक्सर खाद के 10 बैग भी जब्त किये थे. स्थानीय लोगों ने हालांकि इससे कहीं अधिक खाद होने का दावा किया था, लेकिन उपलब्ध विभागीय जानकारी में 10 बैग जब्त किये जाने की बात कही गयी है.

इन अनियमितताओं के आधार पर जिला कृषि पदाधिकारी की ओर से दुकान का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था. बिक्री पर रोक लगायी गयी और दुकानदार से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया.

कार्रवाई के बाद भी बिक्री को लेकर सवाल

यहीं से मामला और पेचीदा हो गया.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निलंबन के बावजूद पूजा ट्रेडर्स से खाद की बिक्री जारी रही. किसानों का सवाल है कि यदि दुकान पर बिक्री प्रतिबंधित थी, तो इसकी निगरानी कौन कर रहा था.

खाद की बिक्री का मामला किसानों के लिए सीधे उनके खेत और फसल से जुड़ा है. खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता को लेकर किसान पहले से ही परेशान रहते हैं. ऐसे में किसी दुकान पर कार्रवाई के बाद भी बिक्री जारी रहने की शिकायत प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करती है.

हालांकि, निलंबन अवधि में बिक्री जारी रहने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं हुई है.

शुरुआती जांच और बाद की रिपोर्ट में क्या बदला?

मामले में दूसरा बड़ा सवाल जांच रिपोर्ट को लेकर है.

आरोप है कि प्रखंड कृषि पदाधिकारी की शुरुआती जांच में जिन बिंदुओं को आधार बनाकर कार्रवाई की गयी थी, बाद में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी की रिपोर्ट में उन तथ्यों को अलग तरीके से देखा गया.

इसके बाद दुकानदार को निलंबन से मुक्त कर दिया गया.

अब स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि यदि शुरुआती जांच में दुकान के संचालन स्थल, स्टॉक, पीओएस और बिना बिल खाद जैसे मुद्दे सामने आये थे, तो बाद की जांच में उनका क्या निष्कर्ष निकला.

क्या दुकानदार ने लाइसेंस में दर्ज स्थान पर दुकान स्थानांतरित कर ली? क्या स्टॉक और पीओएस का अंतर स्पष्ट हो गया? बिना बिल के खाद मिलने के मामले में क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों का विस्तृत जवाब सामने आना अभी बाकी है.

किसानों के बीच क्यों बढ़ी बेचैनी?

किसानों के लिए खाद केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि खेती के पूरे चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है. समय पर खाद नहीं मिलने या नियमों के विपरीत बिक्री होने का असर सीधे फसल पर पड़ सकता है.

इसी कारण स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद दुकानों की जांच और लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई में पारदर्शिता बेहद जरूरी है. अगर किसी दुकान में गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई स्पष्ट होनी चाहिए और अगर बाद की जांच में गड़बड़ी दूर पायी जाती है, तो उसका आधार भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

किसानों का कहना है कि इससे विभाग पर भरोसा बना रहेगा और खाद की बिक्री को लेकर किसी तरह की आशंका नहीं रहेगी.

स्वतंत्र जांच की मांग क्यों उठी?

मामले में शुरुआती कार्रवाई और बाद में निलंबन समाप्त होने के बीच के घटनाक्रम को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से स्वतंत्र जांच की मांग की है.

उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पहली रिपोर्ट में दर्ज अनियमितताओं का क्या हुआ और बाद में दुकान को राहत देने का आधार क्या था.

यदि जांच में किसी अधिकारी या दुकानदार की ओर से नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं, यदि बाद की जांच में सभी अनियमितताओं का समाधान पाया गया है, तो विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.

अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने क्या कहा?

अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मुकेश कुमार ने मामले में कहा कि दुकानदार को लाइसेंस में दर्ज स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि अब कोई गड़बड़ी नहीं है और दुकानदार के पास 'हरा सोना' खाद का वैध लाइसेंस है.

वहीं, जिला कृषि पदाधिकारी नीतीश कुमार भारती ने बताया कि त्रिवेणीगंज एसओ की रिपोर्ट के आधार पर दुकानदार को निलंबन से मुक्त किया गया है. उन्होंने कहा कि उन्हें आगे की जानकारी नहीं है.

Supaul News: अब जवाबदेही और पारदर्शिता की बारी

त्रिवेणीगंज का यह मामला केवल एक खाद दुकान की कार्रवाई तक सीमित नहीं है. यह सवाल भी खड़ा करता है कि कृषि विभाग की जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी है और कार्रवाई के बाद उसकी निगरानी किस तरह होती है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआती जांच में दर्ज तथ्यों और बाद में लिये गये फैसले के बीच जो अंतर दिखाई दे रहा है, उसे विभाग स्पष्ट करे. इससे किसानों के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा और यह भी साफ होगा कि पूजा ट्रेडर्स मामले में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ था या बाद की जांच में स्थिति पूरी तरह बदल गयी थी.

फिलहाल स्थानीय किसानों की नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन इस मामले की आगे जांच कराता है या नहीं और कृषि विभाग शुरुआती जांच से लेकर निलंबन समाप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया को कितनी पारदर्शिता के साथ सामने रखता है.

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लेखक के बारे में

By दीपक कुमार

दीपक कुमार प्रिंट माध्यम में 10 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. त्रिवेणीगंज (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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