शिक्षा व्यवस्था को समावेशी व पारदर्शी बनाए जाने की आवश्यकता

बहुजन समाज शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक रूप से सशक्त हो सकता है.

रतनपुर बसंतपुर प्रखंड अन्तर्गत भगवानपुर पंचायत सरकार भवन परिसर स्थित पुस्तकालय में रविवार को बहुजन महासभा की साप्ताहिक बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित आचार्य रामविलास मेहता ने की. बैठक में शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई. जिसमें विशेष रूप से यूजीसी बिल को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ. वहीं सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाज के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. ताकि अधिक से अधिक लोग इन विषयों को समझ सकें. बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख नियामक संस्था है. इससे संबंधित किसी भी विधेयक का दूरगामी प्रभाव छात्रों, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों पर पड़ता है. उपस्थित सदस्यों ने बिल के विभिन्न प्रावधानों पर अपने-अपने विचार रखे और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की. अध्यक्षता कर रहे आचार्य रामविलास मेहता ने कहा कि शिक्षा समाज के समग्र विकास का आधार है. इसलिए शिक्षा नीति या उससे जुड़े किसी भी कानून में बदलाव से पहले व्यापक स्तर पर संवाद और विचार-विमर्श आवश्यक है. उन्होंने कहा कि बहुजन समाज शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक रूप से सशक्त हो सकता है. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक समावेशी तथा पारदर्शी बनाए जाने की आवश्यकता है. बैठक में डॉ रमेश प्रसाद यादव, राम लखन भारती, रामचंद्र मेहता, सत्यनारायण सहनोगिया, जवाहर ऋषिदेव, मो शमीम, शैलेन्द्र प्रसाद यादव, अभिषेक आनंद, अमरेंद्र गोईत, दिलीप यादव आदि मौजूद थे.

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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