SDO Vinay Kumar: सुपौल के प्रतापगंज प्रखंड के सुरजापुर में शनिवार को बच्चों के भविष्य को लेकर हुई एक बैठक में वीरपुर के अनुमंडल पदाधिकारी विनय कुमार ने अभिभावकों को कई जरूरी बातों के प्रति आगाह किया. उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य केवल स्कूल की पढ़ाई से नहीं बनता, बल्कि घर का माहौल, संगति, अनुशासन और अभिभावकों की निगरानी भी उनकी जिंदगी की दिशा तय करती है.
सुरजापुर स्थित उर्दू मध्य विद्यालय परिसर में स्थानीय ग्रामीणों, बच्चों और अभिभावकों के साथ हुई बैठक में SDO ने प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक अभिभावक की भूमिका में भी लोगों से संवाद किया. उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, उनके व्यवहार, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, वाहन चलाने और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए.
बच्चों को दिए जा रहे पैसों पर भी रखें नजर
SDO विनय कुमार ने कहा कि माता-पिता को बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी गतिविधियों और संगति पर भी नजर रखनी चाहिए. बच्चों को जेब खर्च के रूप में दिए जाने वाले पैसे का इस्तेमाल वे कहां और किस काम में कर रहे हैं, इसकी जानकारी अभिभावकों को होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है. समय रहते उनकी परेशानियों और गतिविधियों को समझ लिया जाए, तो उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोका जा सकता है.
उनके मुताबिक, केवल बच्चों को डांटना या पढ़ाई के लिए दबाव बनाना पर्याप्त नहीं है. अभिभावकों को बच्चों के साथ दोस्ताना संवाद कायम करते हुए उनकी समस्याओं को समझना चाहिए.
बच्चों को वाहन देने से पहले कानून जानें
बैठक में वाहन दुर्घटनाओं और कानूनी जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठा. SDO ने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि किसी वाहन से दुर्घटना होने पर उसकी कानूनी जिम्मेदारी वाहन के पंजीकृत मालिक की होती है.
ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को वाहन देने से पहले यातायात नियमों और कानून की जानकारी रखनी चाहिए. बच्चों की उम्र, वाहन चलाने की क्षमता और नियमों का पालन किए बिना उन्हें वाहन सौंपना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है.
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें वाहन देने के मामले में सावधानी बरतें.
नशे से बच्चों को बचाने में परिवार की बड़ी भूमिका
युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर SDO ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि गलत संगति कई बार बच्चों और युवाओं को धीरे-धीरे नशे की ओर ले जाती है.
ऐसे में परिवार को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नशे और गलत संगति से दूर रखने की अपील की.
उन्होंने कहा कि समय रहते बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दिया जाए और उनसे बातचीत की जाए, तो उन्हें गलत दिशा में जाने से बचाया जा सकता है.
सोशल मीडिया की हर खबर पर भरोसा न करें
सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी SDO ने ग्रामीणों और बच्चों को सावधान किया. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर आने वाली हर जानकारी सही नहीं होती.
कई बार भ्रामक सूचनाएं तेजी से फैलती हैं और लोग बिना उसकी सच्चाई जाने उसका अनुसरण करने लगते हैं. उन्होंने इसे ‘भेड़चाल’ से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी जानकारी को आगे बढ़ाने या उसके आधार पर कोई फैसला लेने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है.
उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया का इस्तेमाल सोच-समझकर करने और बच्चों को भी इसके सही इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने की अपील की.
50 साल पुरानी शिक्षा की मिसाल देकर समझाया महत्व
SDO विनय कुमार ने क्षेत्र के हाजी नजीबुल्लाह साहब हाई स्कूल का उदाहरण देते हुए शिक्षा के महत्व पर भी बात की. उन्होंने कहा कि करीब 50 वर्ष पहले भी इस क्षेत्र के लोग शिक्षा को लेकर जागरूक थे और विशेष रूप से बालिका शिक्षा को महत्व देते थे.
उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर पहले से कहीं अधिक हैं. ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित करें और उनके भीतर अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करें.
SDO Vinay Kumar: बैठक में गंभीरता से सुनी गयीं बातें
बैठक में ग्रामीणों, बच्चों और अभिभावकों ने SDO की बातों को गंभीरता से सुना. बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि बच्चों का भविष्य केवल स्कूल और शिक्षक की जिम्मेदारी नहीं है. परिवार और समाज की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
अभिभावक बच्चों की संगति, पढ़ाई, खर्च, वाहन और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें और उनके साथ लगातार संवाद बनाए रखें, तो कई सामाजिक समस्याओं से बच्चों को समय रहते बचाया जा सकता है.
