सुपौल में 32वीं राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस कार्यशाला आयोजित: DM सावन कुमार ने किया उद्घाटन

सुपौल इंजीनियरिंग कॉलेज में 32वीं राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ. इस कार्यशाला का मुख्य विषय "निरंतरता के लिए विज्ञान व नवाचार" था.

बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार (Innovation) और शोध की भावना विकसित करने के उद्देश्य से सुपौल इंजीनियरिंग कॉलेज के सभागार में 32वीं राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस शिक्षक मार्गदर्शन सह प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया. राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) बिहार, बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (पटना) तथा साइंस फॉर सोसाइटी (बिहार) जिला शाखा (सुपौल) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय "निरंतरता के लिए विज्ञान व नवाचार" रखा गया.

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया:

  • मंच पर मौजूद अतिथि: जिलाधिकारी (DM) सावन कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) संग्राम सिंह, डीपीओ आलोक शेखर आनंद, इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ए.एन. मिश्रा, जिला समन्वयक राजीव कुमार तथा डॉ. निखिल कुमार सिंह.
  • स्वागत गीत: महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सुमधुर स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम की गरिमामयी शुरुआत हुई. स्वागत भाषण अच्युतानंद मिश्रा एवं एस.एन. मिश्रा ने दिया.

"नवाचारी विज्ञान परियोजनाओं का केंद्र बनेगा सुपौल": DM सावन कुमार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी सावन कुमार ने शिक्षकों और बाल वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन किया:

जिलाधिकारी का संदेश: "बाल विज्ञान कांग्रेस बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का एक बेहद सशक्त मंच है. आने वाले समय में सुपौल जिले में नवाचारी विज्ञान परियोजनाओं का बड़ा केंद्र बनने की अपार क्षमता है. शिक्षक विद्यार्थियों को अपने आसपास की सामाजिक व स्थानीय समस्याओं की पहचान करने और उनका वैज्ञानिक तथा व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए प्रेरित करें."

गतिविधि आधारित शिक्षण और AI की भूमिका पर ज़ोर

कार्यशाला में शामिल विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक और शिक्षण पद्धतियों पर अपने विचार साझा किए:

  • प्रयोग आधारित शिक्षा: इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ए.एन. मिश्रा ने कहा कि बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिए क्लासरूम में गतिविधि और प्रयोग आधारित शिक्षण (Activity-based Learning) को बढ़ावा देना समय की मांग है.
  • ICT और AI का इस्तेमाल: डीपीओ आलोक शेखर आनंद ने बाल वैज्ञानिकों द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान में सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (ICT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया.
  • शोध का महत्व: अध्यक्षता कर रहे डॉ. निखिल कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी सफल शोध के लिए लगन, धैर्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अनिवार्य है.

125 से अधिक विद्यालयों के शिक्षकों ने प्राप्त किया प्रशिक्षण

जिला समन्वयक राजीव कुमार ने बताया कि बाल विज्ञान कांग्रेस राज्यभर के प्रतिभाशाली बच्चों की प्रतिभा को निखारने का एक प्रभावी माध्यम है. इस कार्यशाला में सुपौल जिले के 125 से अधिक विद्यालयों के विज्ञान शिक्षकों ने भाग लिया और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया.

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रणव कुमार सिंह द्वारा किया गया.


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लेखक के बारे में

By राजीव कुमार झा

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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