सुपौल. जिले में सालभर पानी से भरे रहने वाले जलक्षेत्र अब स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ाने का जरिया बन सकते हैं. प्रशासन ने इन जलक्षेत्रों का आर्थिक उपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर आधुनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की कवायद शुरू कर दी है. इसी उद्देश्य से उप विकास आयुक्त इंद्रवीर कुमार ने किशनपुर और सरायगढ़ अंचल के विभिन्न जलक्षेत्रों का भ्रमण कर मत्स्य पालन की संभावनाओं का जायजा लिया.
सालभर पानी वाले क्षेत्रों की होगी पहचान
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त ने ऐसे जलक्षेत्रों को चिन्हित किया, जहां पूरे वर्ष पानी उपलब्ध रहता है. अधिकारियों के साथ उन्होंने इन क्षेत्रों को वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन के लिए विकसित करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया.
निरीक्षण में पाया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास सहित जिले के कई अन्य हिस्सों में ऐसे जलक्षेत्र मौजूद हैं, जहां सालभर पानी जमा रहता है. अधिकारियों का मानना है कि इन क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो यहां आधुनिक तकनीक के जरिए बड़े पैमाने पर मछली पालन किया जा सकता है.
किसानों और ग्रामीणों की बढ़ सकती है आमदनी
जलक्षेत्रों के बेहतर उपयोग से स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को रोजगार के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है. प्रशासन की योजना स्थानीय लोगों की सहभागिता के साथ सामूहिक रूप से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की है.
उप विकास आयुक्त इंद्रवीर कुमार ने कहा कि जिले में उपलब्ध जलक्षेत्रों को देखते हुए बड़े क्षेत्र को मत्स्य पालन के लिए विकसित करने की व्यापक रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है. स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर सामूहिक मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाए तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
तीन-चार दिनों में होगा जलक्षेत्रों का सर्वे
निरीक्षण के बाद उप विकास आयुक्त ने सरायगढ़ और किशनपुर अंचल के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि तीन से चार दिनों के भीतर सभी प्रमुख जलक्षेत्रों का सर्वे कर उसका नक्शा तैयार कर प्रस्तुत किया जाए.
सर्वे के दौरान जलक्षेत्रों के क्षेत्रफल, पूरे वर्ष पानी की उपलब्धता और मत्स्य पालन की संभावनाओं से संबंधित जरूरी आंकड़े जुटाने का निर्देश दिया गया है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर मत्स्य पालन के लिए विकसित किया जा सकता है.
बनेगी विस्तृत कार्ययोजना
उप विकास आयुक्त ने जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार को सभी जरूरी आंकड़े एकत्र कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में आवश्यक तैयारी करने को कहा. रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी. इसके आधार पर जलक्षेत्रों के समुचित विकास और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
प्रशासन का मानना है कि जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ किसानों और मछली पालन से जुड़े लोगों की आय में भी वृद्धि की संभावना है.
निरीक्षण के दौरान किशनपुर और सरायगढ़ अंचल के राजस्व कर्मचारी, अंचल अमीन सहित राजस्व से जुड़े पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे.
