बैठक में अनुपस्थित अधिकारियों पर भड़के जनप्रतिनिधि

सदर प्रखंड कार्यालय के सभागार भवन में सोमवार को पंचायत समिति की सामान्य बैठक का आयोजन किया गया.

-सदर प्रखंड में पंचायत समिति की सामान्य बैठक – प्रखंड प्रमुख निरंजना देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक – विकासात्मक कार्यों की हुई बिंदुवार समीक्षा सुपौल. सदर प्रखंड कार्यालय के सभागार भवन में सोमवार को पंचायत समिति की सामान्य बैठक का आयोजन किया गया. बैठक की अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख निरंजना देवी ने की, जबकि संचालन उप प्रमुख जयनंदन पंडित के द्वारा किया गया. बैठक निर्धारित समय से करीब एक घंटा 10 मिनट की देरी से शुरू हुई. बैठक करीब दो घंटा 35 मिनट तक चली. बैठक में प्रखंड स्तरीय विभिन्न विभागों के अधिकारी, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बैठक की शुरुआत पिछले बैठक में उठाये गये सवालों और मुद्दों पर विभागीय जवाब पढ़कर सुनाने के साथ की गयी. इसके बाद एक-एक कर सभी विभागों के कार्यों की समीक्षा की गयी. हालांकि बैठक के दौरान कई विभागीय पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर सदस्यों में गहरी नाराजगी देखने को मिली. 11 महीने बाद हुई बैठक, अधिकारियों की गैरहाजिरी पर नाराजगी बैठक में मौजूद पंचायत समिति सदस्यों व जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पंचायत समिति की सामान्य बैठक प्रत्येक तीन महीने पर होना अनिवार्य है, लेकिन सदर प्रखंड में यह बैठक करीब 11 महीने के लंबे अंतराल के बाद आयोजित की गयी. इसके बावजूद कई विभागों के वरीय व जिम्मेदार अधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुए, जो जनप्रतिनिधियों और जनता के प्रति उदासीनता को दर्शाता है. सदस्यों ने सामूहिक रूप से कहा कि अधिकारी बैठक को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जबकि यही मंच ग्रामीण समस्याओं के समाधान का सबसे बड़ा माध्यम है. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जो अधिकारी बिना सूचना के बैठक में उपस्थित नहीं हुए, उनके विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित कर इसकी सूचना जिला के वरीय अधिकारियों को भेजी जायेगी. मुखिया व समिति सदस्यों की अनुपस्थिति भी रही चर्चा का विषय बैठक में यह भी सामने आया कि सदर प्रखंड के दर्जनों मुखिया व पंचायत समिति सदस्य बैठक में शामिल होना मुनासिब नहीं समझे. इस पर भी मौजूद सदस्यों ने असंतोष जताया. कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता द्वारा चुना गया है, ऐसे में बैठक से अनुपस्थित रहना जनता के साथ अन्याय है. बिजली विभाग की समीक्षा से हुई शुरुआत बैठक में सबसे पहले विद्युत विभाग की समीक्षा की गयी. इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने पंचायत और वार्ड क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की अनियमितता, लो वोल्टेज, ट्रांसफार्मर खराब होने, जर्जर तार व बार-बार बिजली कटौती जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. बैठक में मौजूद बिजली विभाग के जेई ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि जिन क्षेत्रों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं, वहां शीघ्र जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि ट्रांसफार्मर व लाइन से संबंधित समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा. सहकारिता, आपूर्ति और स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल इसके बाद सहकारिता विभाग की समीक्षा की गयी, जहां जनप्रतिनिधियों ने पैक्स के कार्यों, किसानों को मिलने वाले लाभ और पारदर्शिता पर सवाल उठाये. आपूर्ति विभाग की समीक्षा के दौरान जन वितरण प्रणाली में अनियमितता, राशन वितरण में गड़बड़ी और लाभुकों को समय पर अनाज नहीं मिलने जैसे मुद्दे उठाये गये. स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान जनप्रतिनिधियों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, दवाओं की कमी, एंबुलेंस सेवा की अनियमितता और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर चिंता जतायी. संबंधित विभागीय अधिकारियों ने सभी मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया. पीएचईडी विभाग की समीक्षा में मचा हंगामा बैठक में उस समय माहौल गरमा गया जब लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण (पीएचईडी) विभाग की समीक्षा शुरू हुई. विभाग की ओर से बैठक में किशनपुर प्रखंड के जेई अविनाश कुमार उपस्थित थे. जैसे ही उन्होंने अपना परिचय किशनपुर प्रखंड के जेई के रूप में दिया. बैठक में मौजूद विधायक प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार भड़क उठे. विधायक प्रतिनिधि ने कड़े शब्दों में कहा कि सदर प्रखंड की बैठक में किशनपुर प्रखंड के जेई का आना यह दर्शाता है कि विभाग ने बैठक को गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी बिना तैयारी के बैठक में आते हैं और सवालों का जवाब देने से बचते हैं. इस दौरान अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पीएचईडी विभाग से संबंधित कई सवाल पूछे, जिनमें पेयजल आपूर्ति, नल-जल योजना की खराब स्थिति, अधूरे कार्य और शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने जैसे मुद्दे शामिल थे. सवालों के दौरान जेई अविनाश कुमार अधिकतर मौन ही रहे. इसके बाद पंचायत समिति सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव लिया गया कि सुपौल सदर प्रखंड के पीएचईडी जेई की अनुपस्थिति पर उनसे जवाब मांगा जायेगा. इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी जायेगी. अन्य विभागों की भी हुई समीक्षा बैठक में इसके अलावा बाल विकास परियोजना, जीविका, पशुपालन, मनरेगा, स्वच्छता, राजस्व, कृषि सहित अन्य विभागों की भी समीक्षा की गयी. बाल विकास परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति, पोषाहार वितरण और सेविकाओं की उपस्थिति पर चर्चा हुई. मनरेगा की समीक्षा के दौरान मजदूरी भुगतान में देरी, योजना चयन में पारदर्शिता और कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए. वहीं कृषि विभाग की समीक्षा में किसानों को बीज, खाद और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने की बात कही गयी. बैठक के अंत में प्रखंड प्रमुख निरंजना देवी ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि पंचायत समिति की बैठकों को गंभीरता से लिया जाये. अगली बैठक में सभी संबंधित अधिकारी पूरी तैयारी के साथ उपस्थित रहे. उन्होंने कहा कि पंचायत समिति जनता की समस्याओं को उठाने का मंच है. इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. बैठक में बीडीओ कृष्ष्णा कुमार, सीओ आनंद कुमार मंडल, प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी अभिषेक बच्चन, मुखिया विनय मंडल, दिनेश पासी, राजेश चौधरी, उत्तकला देवी, किरण देवी, नीलम देवी, अबुनसर, सुमित्रा देवी, किरण शर्मा, तुलाय पासवान, वीणा देवी, ज्योति कुमारी आदि मौजूद थे.

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