प्रतापगंज BRC में लगा दिव्यांगता जांच शिविर, 110 बच्चों का निबंधन, 35 को मिला प्रमाण पत्र

सुपौल के प्रतापगंज में दिव्यांग बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 110 बच्चों का निबंधन हुआ और 35 को दिव्यांगता प्रमाण पत्र मिले. इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना है.

Supaul News: सुपौल में दिव्यांग बच्चों को सरकारी योजनाओं और शिक्षा से जोड़ने की दिशा में शनिवार को प्रतापगंज में महत्वपूर्ण पहल की गयी. बिहार शिक्षा परियोजना, सुपौल के तत्वावधान में प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC) परिसर में दिव्यांगता प्रमाणीकरण शिविर लगाया गया. शिविर में 110 दिव्यांग बच्चों का निबंधन किया गया, जबकि जांच के बाद 35 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया.

शिविर में 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता की जांच और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी की गयी. विशेषज्ञ चिकित्सकों और संबंधित कर्मियों की टीम ने बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर उनकी दिव्यांगता का आकलन किया.

21 प्रकार की दिव्यांगता की हुई जांच

शिविर में श्रवण, दृष्टि, मानसिक और अस्थि दिव्यांगता समेत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से संबंधित बच्चों की जांच की गयी.

अभिभावक अपने बच्चों को लेकर बीआरसी पहुंचे. विशेषज्ञ टीम ने बच्चों की स्थिति का परीक्षण किया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की. शिविर का उद्देश्य ऐसे बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना था, ताकि वे सरकार की विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठा सकें.

110 बच्चों का हुआ रजिस्ट्रेशन

समाचार प्रेषण तक शिविर में कुल 110 बच्चों का निबंधन किया जा चुका था. जांच के बाद 35 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया.

वहीं, 18 बच्चों को विस्तृत चिकित्सा परीक्षण और प्रमाणीकरण के लिए सदर अस्पताल सुपौल रेफर किया गया है. अन्य बच्चों के प्रमाण पत्र बाद में उपलब्ध कराये जाएंगे.

इस प्रक्रिया से उन बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अलग-अलग जगहों पर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है.

विशेषज्ञों की टीम ने की बच्चों की जांच

शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने बच्चों की जांच में सहयोग किया. डॉ. ज्योति रानी, साइकोलॉजिस्ट, डॉ. राजेश कुमार, ओटी, पुष्कर कुमार, अंकित कुमार, राजीव कुमार और अश्वनी समेत अन्य कर्मी मौजूद रहे.

सीएचसी प्रतापगंज के प्रभारी डॉ. आनंद कुमार सिंह, डॉ. अहमतुल्लाह, सुधांशु कुमार, काजल कुमारी, संगम कुमारी और अभय मंडल समेत स्वास्थ्यकर्मियों ने भी बच्चों की जांच और आवश्यक प्रक्रिया में सहयोग किया.

बीआरसी में कार्यरत धर्मराज, नीतीश कुमार और शिव कुमार की भी शिविर के आयोजन में सक्रिय भूमिका रही.

प्रमाण पत्र से मिल सकेगा योजनाओं का लाभ

दिव्यांगता प्रमाण पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि पात्र बच्चों को कई सरकारी सुविधाओं से जोड़ने का माध्यम भी है. प्रमाण पत्र मिलने के बाद बच्चों को शिक्षा, छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी.

शिविर के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को उनके क्षेत्र में ही पूरा करने का प्रयास किया गया. इससे बच्चों और उनके अभिभावकों को सरकारी सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.

Supaul News: 18 बच्चों को आगे की जांच के लिए भेजा गया

जांच के दौरान जिन बच्चों को विस्तृत चिकित्सा परीक्षण की आवश्यकता महसूस हुई, उन्हें सदर अस्पताल सुपौल रेफर किया गया है. वहां आवश्यक जांच और प्रमाणीकरण की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

शिविर में हुई भागीदारी से यह भी सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग बच्चों के लिए पहचान, प्रमाणन और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर पहुंचाना कितना महत्वपूर्ण है.

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लेखक के बारे में

By सरोज कुमार

सरोज कुमार प्रिंट माध्यम में 13 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. प्रतापगंज (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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